देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों की स्मृति में बनाए गए पिहोवा के शहीदी स्मारक की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। वर्ष 2018 में निर्मित यह शहीदी स्मारक मात्र 8 वर्षों में ही खंडित होने लगा है, जो प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। इस शहीदी स्मारक पर वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से लेकर अब तक देश के लिए बलिदान देने वाले सभी शहीदों के नाम अंकित हैं।
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर राजनेता यहां आकर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और फोटो खिंचवाते हैं, वहीं अन्य अवसरों पर भी देशभक्त नागरिक यहां नमन करने पहुंचते हैं, लेकिन स्मारक की वास्तविक स्थिति की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
मात्र 8 वर्षों में ही स्मारक पर लगाए गए पत्थरों में दरारें पड़ चुकी हैं। बरसात व अन्य स्रोतों से आने वाला पानी स्मारक को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। निर्माण के समय रंग-बिरंगी लाइटें लगाने के लिए स्थान तो बनाए गए थे, लेकिन आज तक वहां लाइटें नहीं लगाई गईं। इसके अलावा आसपास लगे पेड़ों से गिरने वाले सूखे पत्ते स्मारक परिसर में गंदगी फैलाते रहते हैं। सफाई केवल राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर ही करवाई जाती है, बाकी समय यहां गंदगी पसरी रहती है। हैरानी की बात यह है कि शहीदी स्मारक के निकट ही उच्च अधिकारियों के कार्यालय स्थित हैं, इसके बावजूद किसी अधिकारी ने अब तक इसकी सुध नहीं ली। शहीदी स्मारक की यह दुर्दशा देशप्रेमियों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है। शहीदों के सम्मान और उनकी स्मृति को संजोए रखने के लिए प्रशासन द्वारा शीघ्र ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

