Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

खाड़ी देशों के युद्ध ने जगाधरी के मेटल उद्योग की बढ़ाई मुश्किलें

केमिकल और एसिड के दामों में भारी उछाल से उत्पादन प्रभावित

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
जगाधरी की मेटल इंडस्ट्री, जहां युद्ध से उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ी। -हप्र
Advertisement
एशिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली 'धातु नगरी' जगाधरी का मेटल उद्योग इन दिनों अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की मार झेल रहा है। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच गहराते युद्ध के संकट ने स्थानीय मेटल इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी है। कच्चे माल की कमी और ईंधन व रसायनों के रोजाना बढ़ते दामों के कारण उत्पादन की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे जगाधरी का व्यापारिक ढांचा डगमगाने लगा है। दी मानकपुर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने बताया कि चल रहे युद्ध का सीधा असर बिजनेस पर पड़ा है। उन्होंने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि मेटल गलाने में इस्तेमाल होने वाला फर्नेल (एलडीओ) महज एक माह पहले 45 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 72 रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार, सफाई के लिए उपयोग होने वाले एसिड के दाम भी 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

देवेंद्र सिंह के अनुसार, न केवल ईंधन बल्कि स्क्रैप और प्लास्टिक की थैली की कीमतों में भी भारी तेजी आई है। पहले जो प्लास्टिक सामग्री 120 रुपये प्रति किलो मिलती थी, वह अब 180 रुपये के भाव पर है। पॉलिश मसालों के रेट भी लगातार बढ़ रहे हैं। इन परिस्थितियों के कारण जगाधरी की करीब 300 मेटल फैक्ट्रियों में उत्पादन औसतन 30 से 35 प्रतिशत तक गिर गया है।

Advertisement

भविष्य को लेकर चिंता

Advertisement

उद्यमियों का कहना है कि जगाधरी का मेटल उद्योग जहां लाखों लोगों की रोजी-रोटी का जरिया है और सरकार को करोड़ों का राजस्व देता है, वहीं वर्तमान हालात इसकी नींव कमजोर कर रहे हैं। देवेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो हालात और खराब होंगे। उन्होंने कहा कि युद्ध रुकने के बाद भी कारोबार को पटरी पर लौटने में लंबा वक्त लगेगा, जिससे फैक्ट्री मालिकों और मजदूरों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

Advertisement
×