'लोकगीतों की सांस्कृतिक परम्परा का इतिहास हजारों साल पुराना'
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 2 दिवसीय कार्यशाला का समापन
लोकगीतों की सांस्कृतिक परम्परा का इतिहास हजारों साल पुराना है। लोकगीतों के डॉक्यूमेंटेशन से युवाओं को सांस्कृतिक परम्पराओं से जोड़ा जाना चाहिए ताकि वर्तमान पीढ़ी अपने अतीत के सांस्कृतिक इतिहास से रूबरू हो सके। ये उद्गार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान व लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने केयू शिक्षक प्रशिक्षण अनुसंधान संस्थान में हरियाणवी लोकगीत पर आयोजित 2 दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि लोकगीतों का इतिहास की शुरुआत वैदिक काल से होती है। इसके साथ ही महाराजा हर्षवर्धन के काल में भी गीत गाने की परम्परा रही है। हर्षचरित एवं बाणभट्ट की आत्मकथा के माध्यम से प्रमाण मिलते हैं कि हर्षवर्धन की बहन राज्यश्री के विवाह में बारातियों का स्वागत राजधानी थानेसर में सातवीं सदी में गीत गाकर किया गया था। यह लोकगीत हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्हाेंने कहा कि गीतों के माध्यम से ही सामाजिक एवं नैतिक मूल्य निर्धारित होते रहे हैं। इतना ही नहीं हमारी सांस्कृतिक परम्पराओं, रीति -रिवाजों, तीज त्यौहारों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने में लोकगीतों का महत्वपूर्ण योगदान है। इन लोकगीतों में रूपातंरणता, संवदेनशीलता, काव्यात्मकता, आंचलिक भाषा, मन की अभिव्यक्ति, समाज शास्त्र, हास-परिहास, शिक्षा, परम्परा, चुनौतियां, सांस्कृतिक मूल्य सभी कुछ देखने को मिलते हैं। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने आईआईएचएस के डॉ. वीर विकास के निर्देशन में लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। आईटीटीआर की प्राचार्या प्रो. अनिता दुआ ने कहा कि हरियाणा का लोक संगीत यहां की सांस्कृतिक पहचान है जिसके कारण प्राचीन परम्पराएं आज भी जीवंत है। दो दिन तक चली हरियाणवी लोकगीत कार्यशाला में 100 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया। इस मौके पर लोकगीतों का प्रस्तुतिकरण एवं नृत्य गीतों की अभिव्यक्ति मंच के माध्यम से प्रस्तुत की गई। कार्यशाला का उद्देश्य युवा पीढ़ी को लोकगीतों के माध्यम से सांस्कृतिक परम्पराओं से जोड़ना रहा। इस मौके पर संगीत एवं नृत्य क्लब की इंचार्ज डॉ. रोहिणी व रीना यादव सहित डॉ. दिग्विजय सिंह, डॉ. अंग्रेज सिंह, दिविज गुगनानी, डॉ. ममता चावला, डॉ. रीटा सैनी, डॉ. मनप्रीत कौर, पूजा सैनी व कंवलप्रीत कौर मौजूद रहे।

