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डीएसपी पर लगाए आरोप निराधार, हेड कांस्टेबल सुनील संधू बर्खास्त

सोशल मीडिया पर पोस्ट व जांच प्रभावित करने के आरोप में कार्रवाई

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बर्खास्त हेड कांस्टेबल सुनील संधू का फाइल फोटो। 
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एसपी उपासना बोलीं- वर्दी की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

कैथल पुलिस विभाग के भीतर उपजे विवाद में कड़ा संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक उपासना सिंह ने नशा मुक्ति टीम के सदस्य हेड कांस्टेबल सुनील संधू को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एसपी ने स्पष्ट किया कि संधू द्वारा कलायत के डीएसपी ललित यादव पर लगाए आरोप जांच में पूरी तरह तथ्यहीन पाए गए हैं। एसपी ने कहा कि सुनील संधू नशा मुक्ति टीम में तैनात थे और ड्यूटी के दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी व कार्रवाई से जुड़े वीडियो अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर सांझा करते थे, जो सेवा नियमों का उल्लंघन है। विभाग के आधिकारिक प्लेटफॉर्म मौजूद होने के बावजूद निजी प्रचार के उद्देश्य से इस तरह की पोस्ट डालना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

एसपी ने बताया कि 16 फरवरी को सिटी थाना क्षेत्र में हुई एक रेड के दौरान एनडीपीएस एक्ट की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार तलाशी राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे केस कमजोर हो गया और पूरी कार्रवाई विफल रही। विभागीय जांच में इस लापरवाही की जिम्मेदारी नशा मुक्ति टीम के हेड कांस्टेबल सुनील संधू पर तय की गई। इसी प्रकरण में 2 दिन पहले उन्हें सहित नशा मुक्ति टीम के 9 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया था। उनका कहना है कि संधू ने सोशल मीडिया पर भूख हड़ताल और साथियों को बुलाने जैसे बयान देकर दबाव बनाने की कोशिश की, जिससे पुलिस के खिलाफ भ्रामक खबरें फैलने लगीं। एसपी ने कहा कि पंजाब पुलिस नियमावली के नियमाें की अवहेलना की गई है, इसलिए हवलदार सुनील संधु को सरकारी सेवा से बर्खास्त किया गया है। मुख्य सिपाही सुनील द्वारा घोर दुराचार, अवज्ञाकारिता व अनुशासहीनता का परिचय दिया गया।

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सोशल मीडिया पोस्ट बनी गले की फांस

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मामले की शुरुआत 23 फरवरी को सुनील संधू की एक फेसबुक पोस्ट से हुई थी, जिसमें उन्होंने डीएसपी ललित यादव पर उन्हें झूठे नशा तस्करी केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया था। एसपी उपासना ने बताया कि संधू आधिकारिक प्लेटफॉर्म के बजाय निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर छापेमारी के वीडियो साझा कर रहे थे, जो पुलिस सेवा नियमावली का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भूख हड़ताल और साथियों को जुटाने जैसे बयान देकर विभाग पर दबाव बनाने और भय का वातावरण पैदा करने की कोशिश की।

संधू की गिड़ी तबीयत

सूत्रों के अनुसार विवाद के बाद संधू की तबीयत बिगड़ गई और वे फिलहाल कैथल के एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन बताए जा रहे हैं। पुलिस विभाग ने साफ संदेश दिया है कि वर्दी की गरिमा और सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन पर किसी भी स्तर पर सख्ती बरती जाएगी।

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