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रेलवे पुलिस ने किसान नेता के घर पर चस्पा किया नोटिस, 10 अप्रैल को पेश होने के निर्देश

मुस्तफाबाद स्टेशन पर ट्रेन रोकने का मामला : भाकियू ने दी ट्रैक जाम करने की चेतावनी

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भाकियू के जिला प्रधान संजू गुन्दियाना
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रेलवे पुलिस बराड़ा द्वारा भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के जिला प्रधान संजू गुन्दियाना के निवास पर पुलिस जांच में शामिल होने का नोटिस चिपकाया गया है। इस नोटिस में उन्हें आगामी 10 अप्रैल को पेश होने के लिए कहा गया है। यह कार्रवाई मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव को लेकर किए गए पुराने प्रदर्शन के सिलसिले में की गई है। नोटिस मिलने के बाद किसान नेता ने कड़ा रुख अपनाते हुए किसी भी तरह की जांच में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है।

संजू गुन्दियाना ने कहा कि वर्ष 2024 में मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर गाड़ियों के ठहराव की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण धरना दिया था। 2019-20 में कोरोना काल के दौरान पैसेंजर ट्रेनें बंद कर दी गई थीं, जिससे शहर जाकर मजदूरी करने वाले ग्रामीणों, नौकरीपेशा लोगों और स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों का आवागमन ठप हो गया था। ग्रामीणों ने एक साल तक अम्बाला डीआरएम कार्यालय के चक्कर काटे। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और तत्कालीन सांसद नायब सैनी को भी मांग पत्र दिए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। उस समय रेलवे विभाग के एआरएम हनुमान प्रसाद ने मौके पर पहुंचकर आश्वासन दिया था कि दो दिन में ट्रेनें रुकेंगी और ग्रामीणों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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वादाखिलाफी का आरोप और भविष्य की रणनीति

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जिलाध्यक्ष गुन्दियाना ने कहा कि रेलवे अधिकारियों ने वादाखिलाफी की है। तीन साल बाद पुलिस मुकदमे दर्ज कर नोटिस दीवारों पर चिपका रही है। हम सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि हम किसी जांच में शामिल नहीं होंगे। यदि कोई दमनकारी कार्रवाई की गई, तो ग्रामीण दोबारा रेलवे ट्रैक जाम करने पर मजबूर होंगे। किसान यूनियन का आरोप है कि प्रशासन ने उस समय धरना समाप्त करवाने के लिए झूठा आश्वासन दिया था। अब पुलिस द्वारा नोटिस चिपकाए जाने से ग्रामीणों में भारी रोष है। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि मुकदमों को रद्द करवाने के लिए वे बड़े आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।

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