भाजपा कार्यालय से पार्टी की प्रथम मेयर के खिलाफ पत्रकार वार्ता पर अनुशासनहीनता की हद : प्रीतम गिल
भाजपा के जिला कार्यालय में मेयर शैलजा संदीप सचदेवा के खिलाफ हाल ही में हुई पत्रकार वार्ता को लेकर मेयर पक्ष ने कड़ा एतराज जताया है। मेयर शैलजा संदीप सचदेवा के निजी सहायक प्रीतम सिंह गिल ने कहा कि पार्टी...
भाजपा के जिला कार्यालय में मेयर शैलजा संदीप सचदेवा के खिलाफ हाल ही में हुई पत्रकार वार्ता को लेकर मेयर पक्ष ने कड़ा एतराज जताया है। मेयर शैलजा संदीप सचदेवा के निजी सहायक प्रीतम सिंह गिल ने कहा कि पार्टी कार्यालय में बैठकर मेयर और कालका विधायक के खिलाफ जो अनर्गल दुष्प्रचार किया गया, वह अनुशासनहीनता की हद है और भाजपा की रीति-नीति से कोसों दूर है। उन्होंने बताया कि मेयर ने कालोनियों को वैध करवाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं, जबकि पार्टी के कुछ लोग अपनी सत्ता के लंबे समय में इसे सफल नहीं कर पाए और संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
आलाकमान संज्ञान लेकर करे अनुशासनात्मक कार्रवाई
प्रीतम गिल ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में आए कुछ लोग अभी भी पुराने तरीकों और कांग्रेस की व्यक्तिवादी पूजन की सोच से प्रभावित हैं। उनका कहना था कि ऐसे लोग पार्टी के कामकाज को समझने में विफल हैं और संगठनात्मक अनुशासन तोड़ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे और अनुशासनहीन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
'पार्टी बदलने वालों की नहीं बदली प्रवृत्ति'
राजनीतिक सचिव मोहित आहलूवालिया ने भी पत्रकार वार्ता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेयर के खिलाफ बयान देने वाले लोग लगातार पार्टियां बदलते हैं और पुराने तरीकों को नहीं भूल पाए हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम की पूर्व महापौर और वर्तमान कालका विधायक शक्ति रानी शर्मा ने इन्हें निगम में पद दिलवाया था, लेकिन अब वही उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं, जो उनकी पलटी मारने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
यह है मामला
दरअसल, बीते दिनों पार्षदों और डिप्टी मेयर ने पार्टी पदाधिकारियों की मौजूदगी में अवैध कालोनियों को वैध करवाने का श्रेय पूर्व मंत्री असीम गोयल को दिया और मेयर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके जवाब में आज मेयर पक्ष ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर अपना पक्ष रखा।
नगर निगम बनने के बाद शैलजा संदीप सचदेवा भाजपा की पहली मेयर हैं, लेकिन पार्टी में मचे घमासान और कुछ पदाधिकारियों की प्रतिकूल स्थिति के कारण उनके निर्देशों का पालन नहीं हो पा रहा है। इस विवाद से स्पष्ट है कि पार्टी में संगठनात्मक अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चुनौती बनी हुई है।

