शाहाबाद में सियासी टकराव चरम पर : बजट बैठक का सामूहिक बहिष्कार, बिना कोरम रद्द
शाहाबाद मारकंडा नगरपालिका की वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट बैठक अभूतपूर्व हालात में बिना कोरम के रद्द करनी पड़ी। यह पहला मौका रहा जब नगरपालिका प्रधान समेत पक्ष और विपक्ष के सभी पार्षदों ने बैठक का सामूहिक बहिष्कार किया,...
शाहाबाद मारकंडा नगरपालिका की वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट बैठक अभूतपूर्व हालात में बिना कोरम के रद्द करनी पड़ी। यह पहला मौका रहा जब नगरपालिका प्रधान समेत पक्ष और विपक्ष के सभी पार्षदों ने बैठक का सामूहिक बहिष्कार किया, जिससे स्थानीय राजनीति में गहराते टकराव खुलकर सामने आ गए।
नगरपालिका सचिव बंबूल सिंह मलिक द्वारा 17 मार्च को जारी एजेंडे के अनुसार बैठक सुबह 10 बजे बुलाई गई थी, लेकिन तय समय पर एक भी पार्षद उपस्थित नहीं हुआ। कॉन्फ्रेंस हॉल में केवल मनोनीत पार्षद दीपक आनंद और सचिव ही मौजूद रहे। करीब 45 मिनट इंतजार के बाद कोरम पूरा न होने पर बैठक रद्द कर दी गई।
बहिष्कार के पीछे नगरपालिका प्रधान और सचिव के बीच बढ़ते विवाद को मुख्य कारण माना जा रहा है। पूर्व नपा प्रधान हरीश कवातरा के कार्यालय में जुटे पार्षदों—पंकज सिंगला, अमित सिंघल, विजय कलसी, अमृतलाल और प्रतिनिधि प्रभजीत सिंह तनेजा व अजय तुषार—ने आरोप लगाया कि नगरपालिका में उनकी सुनवाई नहीं हो रही और विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। उनका कहना है कि अगस्त 2025 के बाद से कोई टेंडर जारी नहीं हुआ और स्वीकृत परियोजनाओं पर भी काम शुरू नहीं हुआ।
विपक्ष ने मौजूदा प्रधान गुलशन कवातरा के कार्यकाल को “सबसे असफल” बताते हुए भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। वहीं पूर्व प्रधान हरीश कवातरा ने भी नगर में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, नगरपालिका प्रधान गुलशन कवातरा ने सचिव को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि प्रस्तावों पर कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने बहिष्कार को पार्षदों की सहमति से लिया गया कदम बताया। उधर, सचिव बंबूल सिंह मलिक ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बैठक में आकर मुद्दे उठाने चाहिए थे, बहिष्कार उचित नहीं।
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दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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