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पानीपत के बुआना लाखु में 100 एकड़ से ज्यादा गेहूं की फसल जली

ग्रामीणों ने ट्रैक्टर-हेरो और पानी के टैंकरों से पाया काबू, एसडीएम ने खेतों में पहुंचकर बंधाया ढांढस

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पानीपत के गांव बुआना लाखु के खेतों में जली फसल के अवशेष दिखाते पीड़ित किसान। -हप्र
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इसराना सब-डिवीजन के गांव बुआना लाखु में शुक्रवार दोपहर आग ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते दर्जनों किसानों की सालभर की मेहनत राख में तब्दील हो गई। तेज हवाओं के चलते आग इतनी तेजी से फैली कि करीब 100 एकड़ से ज्यादा खड़ी फसल जलकर खाक हो गई। हालांकि, ग्रामीणों की एकजुटता ने एक बड़ी तबाही को टाल दिया, वरना आग कई अन्य गांवों को भी अपनी चपेट में ले सकती थी। आग दोपहर बाद बिजावा रोड से शुरू हुई।

माना जा रहा है कि सड़क किनारे पड़ी तूड़ी से चिंगारी उठी और तेज हवा ने उसे दावानल बना दिया। आग लगते ही गांव बुआना लाखु और आसपास के ग्रामीण ट्रैक्टर-हेरो और निजी पानी के टैंकर लेकर खेतों की ओर दौड़ पड़े। आग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए ग्रामीणों ने जलते खेतों के चारों ओर ट्रैक्टरों से जुताई कर दी, ताकि 'फायर लाइन' बन सके। जब तक दमकल विभाग की गाड़ी पहुंची, तब तक ग्रामीणों ने अधिकांश आग पर काबू पा लिया था। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम इसराना नवदीप सिंह नैन, नायब तहसीलदार बंशी लाल और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जब कई किसानों ने रोते हुए कहा कि साहब, अब तो परिवार के खाने के लिए भी दाना नहीं बचा, तो एसडीएम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत अपने मोबाइल से डीसी डॉ. विरेंद्र कुमार दहिया की बात किसानों से करवाई। डीसी व एसडीएम ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार की तरफ से हर संभव आर्थिक मदद और मुआवजा दिलवाया जाएगा। फिलहाल पटवारी और कानूनगो जली हुई फसल का सटीक आंकलन कर रहे हैं।

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इन किसानों के अरमानों पर फिरा पानी

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आग की इस घटना में किसान दिलबाग सिंह, फतेह सिंह, अनिल कुमार, धूला राम, राजू, अशोक, संदीप मलिक, तेजवीर मलिक, रविंद्र, जगदीश, राजेश, बलराज मोर और रणधीर सिंह सहित अनेक किसानों की फसल पूरी तरह जल गई। पीड़ित किसानों ने रोते हुए बताया कि बिजली की आपूर्ति बंद थी, फिर भी आग कैसे लगी, यह समझ से परे है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि आग लगने के काफी देर बाद दमकल की गाड़ी पहुंची। यदि ग्रामीण खुद मोर्चा न संभालते, तो नुकसान का आंकड़ा कई गुना ज्यादा हो सकता था।

पानीपत के इसराना, मतलौडा व बापौली में दमकल गाड़ियां तैनात करने की मांग

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई का सीजन पूरे जोरों पर है, लेकिन सुरक्षा के इंतजामों में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। दमकल विभाग ने अब तक जिले के महत्वपूर्ण कस्बों इसराना, मतलौडा और बापौली में दमकल गाड़ियां तैनात नहीं कीं। शुक्रवार को इनेलो हलका प्रधान राजेंद्र जागलान एडवोकेट के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने इसराना अनाज मंडी के गेट पर प्रदर्शन किया। राजेंद्र जागलान ने कहा कि पहले हर सीजन में इन स्थानों पर एक-एक गाड़ी खड़ी की जाती थी, ताकि आगजनी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। पानीपत शहर से इन कस्बों की दूरी लगभग 18-20 किलोमीटर है। शहर से दमकल गाड़ी पहुंचने में कम से कम आधा घंटा लगता है, जबकि आग लगने पर शुरुआती 10 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। 8 अप्रैल से दमकल कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे व्यवस्था और भी चरमरा गई है। पहले विभाग ने गाड़ियां खड़ी करने में देरी की, और अब हड़ताल के कारण संसाधन और भी सीमित हो गए हैं।

गांव मुसिम्बल के खेतों में लगी आग, लाखों की गेहूं और भूसा जलकर राख

यमुनानगर (हप्र) : गांव मुसिम्बल में शुक्रवार को खेतों के ऊपर से गुजर रही बिजली की हाई टेंशन तारों ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया। तारों से निकली एक छोटी सी चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे लाखों रुपये की गेहूं और खेतों में रखा भूसा जलकर खाक हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के समय तेज हवाएं चल रही थीं। इसी दौरान खेतों के ऊपर से गुजर रही ढीली तारों के आपस में टकराने या टूटने से चिंगारी गेहूं की सूखी फसल पर गिरी। सूखी फसल और तेज हवा के कारण आग ने पलक झपकाने से पहले ही कई एकड़ को अपनी चपेट में ले लिया।आग की लपटें उठती देख आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग अपने साधनों के साथ मौके पर पहुंचे। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर अधिकारी अक्षय कुमार और पुलिस टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। ग्रामीणों ने बताया कि अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाता, तो यह सैकड़ों एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले सकती थी। प्रभावित किसानों ने सरकार से विशेष गिरदावरी करवाकर आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

बिजली विभाग पर फूटा गुस्सा

मुसिम्बल निवासी हरमीत सिंह, विक्की और भाटली निवासी रविन्द्र सहित अन्य ग्रामीणों ने इस नुकसान के लिए सीधे तौर पर बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों से गुजर रही हाई टेंशन तारें काफी ढीली हैं। इस बारे में कई बार शिकायत की गई, लेकिन विभाग ने मरम्मत की जहमत नहीं उठाई। किसानों ने मांग की है कि कटाई के सीजन को देखते हुए ढीली तारों को तुरंत टाइट किया जाए और जर्जर पोल बदले जाएं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

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