कुरुक्षेत्र से था महात्मा गांधी का गहरा नाता, लोगों के बुलावे पर भेजी थीं सरोजिनी नायडू
जयंती विशेष : स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारी ने साझा की यादें
आजादी के महान आंदोलन के दौरान कुरुक्षेत्र की धरती और यहां के स्वतंत्रता सेनानियों का महात्मा गांधी के साथ एक अनूठा और गहरा नाता रहा है। इतिहास के पन्नों को याद करते हुए क्षेत्र के सेनानी लाला फग्गू राम सेवक के उत्तराधिकारी 80 वर्षीय रामदास गोयल ने महात्मा गांधी की जयंती की पूर्वसंध्या पर कई अहम संस्मरण साझा किए।
रामदास गोयल ने बताया कि उस दौर में पुराना करनाल जिला (जिसमें वर्तमान कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल और आसपास के क्षेत्र शामिल थे) अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए जाना जाता था। उनके पिता लाला फग्गू राम सेवक की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा विशेष ड्यूटी लगाई गई थी कि वे क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए जागरूक करें और एकजुट करें। इसी जिम्मेदारी के तहत लाला फग्गू राम ने कुरुक्षेत्र, कैथल और करनाल क्षेत्र में अनगिनत जनसभाएं कर लोगों को आजादी की लड़ाई में डटकर भाग लेने के लिए प्रेरित किया था।
संस्मरण साझा करते हुए रामदास ने बताया कि 1930 के दशक में कुरुक्षेत्र के लोगों की तीव्र इच्छा थी कि महात्मा गांधी स्वयं यहां आएं और जनता को संबोधित कर उनमें देशप्रेम का जज्बा पैदा करें। इसके लिए लाला फग्गू राम सेवक ने महात्मा गांधी को पत्र लिखकर क्षेत्र में पधारने का न्योता दिया था। हालांकि, उस समय राष्ट्रव्यापी आंदोलनों में अत्यधिक व्यस्तता के कारण महात्मा गांधी का आना संभव नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने देश की महान कवयित्री और प्रखर वक्ता सरोजिनी नायडू को हरियाणा के लोगों से संवाद करने के लिए भेजा। सरोजिनी नायडू ने वर्ष 1936 से 1938 के दौरान हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया और ओल्ड करनाल जिले के कई गांवों में सभाएं कर लोगों को स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग देने की अपील की।

