सनौली रोड आदर्श कालोनी स्थित श्री भगवान परशुराम मंदिर में भगवान परशुराम जन्मोत्सव सोमवार को धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम के तहत सोमवार को दूसरे दिन विशाल कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर भगवान परशुराम के यश का गान किया गया व भण्डारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि नवीन भाटिया व राजीव जेतली ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।तत्पश्चात श्री राम मंदिर धाम वार्ड नं. 7 के सदस्यों ने श्री रामचरितमानस पाठ का भोग डाला गया। इस अवसर मुरथल से पधारे स्वामी दयानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि मातृ-पितृ भक्ति के अनुपम उदाहरण है। भगवान परशुराम ने पिता की आज्ञा के बाद एक क्षण का भी विचार नहीं किया और माता का शीश काट दिया क्योंकि वे अपने पिता के सामर्थ्य को जानते थे और उसके बाद वरदान स्वरूप उन्होंने अपनी माता को पुनः जीवित भी करवा लिया। गुरु गद्दी गाहडू लाल से पधारे महंत वेदप्रकाश गोस्वामी ने कहा कि ऐसा कहा जाना कि भगवान परशुराम को क्रोध बहुत आता था ऐसा कहना पूर्ण सत्य नहीं है। भगवान विष्णु के छठे अवतार व पूर्ण सामर्थ्यशाली ऐसा केवल लीलावश करते थे। ब्रह्मर्षि श्रीनाथ महाराज ने कहा कि भगवान परशुराम अजर, अमर हैं वे चाहते तो अकेले ही अत्याचारी रावण का संहार कर सकते थे लेकिन उन्होंने युग की मर्यादा के अनुसार भगवान राम को ही आगे किया। डाॅ. महेन्द्र शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया का दिन सनातन धर्म में बहुत मायने रखता है।
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