'दूध उत्पादन में भारत ने अमेरिका व चीन को भी पीछे छोड़ा'
एनडीआरआई में तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेरी मेला एवं कृषि एक्सपो-2026 शुरू
भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में शुक्रवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेरी मेला एवं कृषि एक्सपो-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने पशुपालन क्षेत्र की उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों का खाका पेश किया। डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने बताया कि भारत वर्तमान में 248 मिलियन टन दूध उत्पादन के साथ विश्व में प्रथम स्थान पर है, जो वैश्विक उत्पादन का एक चौथाई हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत ने उत्पादन में अमेरिका, चीन और ब्राजील जैसे बड़े देशों को पछाड़ दिया है। डॉ. भट्टा ने भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन और वर्ष 2047 तक 600 मिलियन टन उत्पादन हासिल करना है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश उत्पादन में देश का नेतृत्व कर रहा है, जिसके बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान आता है।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश में 7 से 8 करोड़ लोग आजीविका के लिए पशुपालन पर निर्भर हैं, जिनमें 17 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने जानकारी दी कि संस्थान द्वारा हाल ही में विकसित 'कर्ण फ्रीज' गाय का पंजीकरण किया गया है। उन्होंने मेले को पशुपालकों के लिए ज्ञान का केंद्र बताते हुए कहा कि यहां पोषण, प्रसंस्करण और विस्तार की समस्त जानकारियां एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। विशिष्ट अतिथि और महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. मल्होत्रा ने बागवानी और डेरी की समेकित खेती अपनाने का आह्वान किया। वहीं, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. राजन शर्मा ने बताया कि मेले में एनडीआरआई के 16 और आईसीएआर के 8 संस्थानों सहित 70 वाणिज्यिक स्टॉल लगाए गए हैं। इस अवसर पर एनबीएजीआर के निदेशक डॉ. एन.एच. मोहन सहित कई वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
पशु प्रतियोगिताओं में 400 पशुओं के साथ पहुंचे पशुपालक
मेले में पशुपालक अपने 400 उत्कृष्ट पशुओं के साथ पहुंचे हैं। विभिन्न श्रेणियों की पशु प्रतियोगिताओं के विजेताओं के लिए कुल 12 लाख रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है।

