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शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार और पंच परिवर्तन पर रहेगा फोकस : मोहन भागवत

पट्टीकल्याणा में आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का शंखनाद

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समालखा में प्रतिनिधि सभा का उद्घाटन करते सरसंघचालक मोहन भागवत।  -निस
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सभा में देशभर से 1400 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने लिया भाग

संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने शुक्रवार सुबह भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का शुभारंभ किया। इस सभा में देशभर से आए 1400 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी प्रतिनिधि सभा मे मंच के सामने पहली पंक्ति मे बैठे नजर आए। उद्घाटन सत्र के बाद संघ के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने पत्रकारों को बैठक की रूपरेखा और संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। इस दौरान अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर भी उपस्थित रहे। बैठक में समाज जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए पंच परिवर्तन के पांच स्तंभों सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी के प्रति गौरव, परिवार व्यवस्था का संरक्षण व नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पर चर्चा की गई

सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने मीडिया को बताया कि संघ का मुख्य फोकस अब समाज में सद्भाव और समरसता को बढ़ावा देना है। शताब्दी वर्ष की शुरुआत 2 अक्तूबर 2025 को नागपुर में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की उपस्थिति में हुई थी। पिछले एक वर्ष में संघ के कार्य का विस्तार तेजी से हुआ है। अब देशभर में 88,949 शाखाएं 55,683 स्थानों पर संचालित हो रही हैं। 37 प्रांतों में चलाए गए इस अभियान के तहत 10 करोड़ से अधिक घरों और लगभग 3.9 लाख गांवों तक संघ की पहुंच बनी है। इसमें बिना किसी भेदभाव के विभिन्न समुदायों, जिनमें केरल के मुस्लिम और ईसाई परिवार भी शामिल हैं, से संवाद स्थापित किया गया। इसके साथ ही देशभर में अब तक 37 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें लगभग साढ़े 3 करोड़ लोगों ने भागीदारी की है।

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बांग्लादेश में हिंदू समाज की वर्तमान स्थिति पर जताई चिंता

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सीआर मुकुंद ने कहा कि संघ देश के विभिन्न हिस्सों में शांति और विकास का समर्थक है। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुधार और मणिपुर में शांति बहाली पर संतोष जताया। वहीं, पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू समाज की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। मुकुंद ने कहा कि संघ का प्रयास है कि आने वाले समय में गांवों और कस्बों में अधिक से अधिक शाखाएं प्रारंभ कर समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। उन्होंने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष कार्यक्रम अक्तूबर 2026 तक देशभर में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जारी रहेगा।

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