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युद्ध लंबा चला तो टेक्साटाइल निर्यात को लगेगा जोर का झटका

अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जंग के चलते अटके कंटेनर

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मिडिल ईस्ट देशों मे ईरान के हमलों के चलते पानीपत टेक्सटाइल उद्योगों की चिंताए बढ़ गई। इन देशों में 60 प्रतिशत से अधिक हैंडलूम, कारपेट का निर्यात पानीपत से होता है। टेक्सटाइल उद्योग पहले ही ट्रंप के टैरिफ से जूझ रहा था कि अब अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते सैकड़ों कंटेनर युद्ध प्रभावित देशों में आने-जाने से प्रभावित हो रहे है। माल रास्ते में अटका पड़ा है। जानकार निर्यातकों का कहना है कि यदि स्थिति दो-चार दिन में नहीं सुधरती और युद्ध लंबा चलता है तो पानीपत के टेक्सटाइल निर्यात को जोर का झटका लगेगा। पानीपत से मिडिल ईस्ट के देशों में कारपेट, हैंडलूम उत्पाद के साथ साथ कंबल निर्यात होता है। इन देशों से भरी मात्रा में रुग्स आदि का आयात होता है। पानीपत में कुछ निर्यातक इस्राइल को कपड़ा बनाकर भेजते हैं, हालांकि यह कपड़ा गल्फ देशों में पाकिस्तान से बनकर जाता है।चूंकि इस्राइल के कारोबारी पाकिस्तान के स्थान पर भारत को तरजीह देते है, इसीलिए पानीपत से कई निर्यातक इस्राइल को कपड़ा निर्यात करते है। युद्ध होने के कारण कपड़े का निर्यात प्रभावित होने लगा है ।

हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के स्टेट प्रेसिडेंट विनोद खंडेलवाल का कहना है कि पानीपत में घरेलू बाजार में खपने वाला कंबल, थ्रीडी चादर और पॉलिएस्टर यार्न युद्ध होने की वजह से प्रभावित हो रहे हैं। कंबल, थ्रीडी चादर को बनाने में पॉलिएस्टर यार्न का इस्तेमाल होता है जो पेट्रोलिइम पदार्थों से बनता है। यदि क्रूड ऑइल (कच्चा तेल) के दाम बढ़ते हैं तो पानीपत का टेक्सटाइल उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित होगा। उद्यमियों की नजरें युद्ध पर लगी हुई है। निर्यातक युद्ध प्रभावित देशों के खरीदारों से संपर्क साध रहे हैं। कुछ जानकार निर्यातकों ने बताया कि विदेशी कारोबारियों से संकेत मिलने शुरू हो गए है कि जब तक स्थिति साफ नहीं होती ऑर्डर को होल्ड पर रखना पड़ सकता है। हरियाणा के बजट से पानीपत के उद्यमियों को काफी उम्मीद थी। मुख्यमंत्री ने बजट पूर्व उद्यमियों के साथ बैठक में उनकी मांगों को बजट में शामिल करने का आश्वासन दिया था लेकिन बजट में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ज़ेडएलडी), कॉमन बायलर, टेक्सटाइल पार्क एक्सिबिशन हाल संबंधी किसी भी मांग का बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया। बिजली के फिक्स चार्ज भी कम नहीं किए गए और इसके चलते उद्यमियों ने बजट को निराशाजनक बताया। केंद्रीय बजट से भी पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग को कुछ नहीं मिला था।

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