जिले के विभिन्न गांवों में सोमवार को अचानक लगी आग ने भारी तबाही मचा दी। अलग-अलग स्थानों पर गेहूं के फाने और तूड़ी जलकर राख हो गई, जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ा। दरअसल जैसे ही गेहूं निकालने के बाद खेत खाली होते है तो आगजनी की घटनाएं यकायक बढ़ जाती हैं। हालांकि इसका वास्तविक कारण कुछ किसानों द्वारा खेत में बचे फानों में जानबुझकर आग लगाना होता हैं। कई बार फानों में लगी आग गेहूं या खेतों में पड़ी तूड़ी को चपेट में ले लेती है। कई बार तो आग हवा के कारण इतनी अधिक फैल जाती हैं कि खेतों के नजदीक आबादी तक पहुंच जाती हैं। सोमवार को गांव धांगड़ में उपलों में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और तेजी से फैलते हुए राजकुमार के खेतों तक पहुंच गई। इस आग में 5 एकड़ में गेहूं के फाने जलकर नष्ट हो गए। इसी तरह गांव सिरढ़ान में मदन लाल के खेतों में आग लगने से 6 एकड़ में फाने जल गए। वहीं भोडिया खेड़ा गांव में हनुमान के खेतों में आग ने भारी नुकसान किया। यहां 5 एकड़ में फाने जल गए, जबकि आग सड़क पार कर दूसरी ओर पहुंच गई और वहां इसी किसान की करीब 3 एकड़ की तूड़ी के ढेर में आग लगने से जलकर खाक हो गई।
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