Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

फाइलों पर हस्ताक्षर न करने को लेकर फाइनेंस कमेटी के सदस्य व पार्षद भिड़े

फतेहाबाद नप की बजट बैठक में जोरदार हंगामा

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
फतेहाबाद नप की बैठक में आपस में बहस करते पार्षद व सदस्य। -हप्र
Advertisement
  • एक्सईएन के तबादले और आपसी गुटबाजी से बंटाधार

करीब पांच महीने के लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को आयोजित फतेहाबाद नगर परिषद की बजट बैठक शहरवासियों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई थी, लेकिन यह बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। हाउस की जरनल बैठक शुरू होते ही पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक और व्यक्तिगत आरोपों के कारण प्रधान, उपप्रधान और अधिकारियों को मीटिंग छोड़कर जाना पड़ा। परिणाम स्वरूप, बजट बैठक को स्थगित कर दिया गया है, जिससे शहर के विकास कार्यों पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। हंगामे की मुख्य वजह वार्डों के विकास कार्यों की फाइलों पर हस्ताक्षर करना रहा।

पार्षद निर्मल सिवाच ने फाइनेंस कमेटी सदस्य अनिल गर्ग पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि गर्ग ने केवल अपने करीबी 8 पार्षदों के करोड़ों रुपये के कामों की फाइलों पर साइन किए हैं, जबकि अन्य पार्षदों की फाइलों को लटकाया जा रहा है। बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों प्रतिनिधि 'तू-तड़ाक' पर उतर आए। जब सिवाच ने हस्ताक्षर की बात कही, तो अनिल गर्ग ने कथित तौर पर कहा, 'नहीं करूंगा साइन, मेरी मनमर्जी। ज्यादा बकवास मत कर। निर्मल सिवाच ने कहा कि फाइनेंस कमेटी का मौजूदा कार्यकाल खत्म हो चुका है, अब नई कमेटी बनाई जानी चाहिए। चुनिंदा पार्षदों के काम हो रहे हैं और बाकी शहर नरक बना हुआ है। अब तो एक्सईएन का भी तबादला हो गया है, ऐसे में विकास कार्य फिर से लटक जाएंगे।

Advertisement

अधिकारियों के तबादले और बदहाल शहर

Advertisement

शहर की मौजूदा स्थिति पर नगर परिषद प्रधान राजेंद्र खिची ने बेबसी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले 10 महीनों से एक्सईएन न होने और अब डबवाली से आए एक्सईएन के एक महीने में ही तबादले से काम ठप हैं। शहर के पार्कों, चौक-चौराहों और शौचालयों का बुरा हाल है। ठेकेदार काम छोड़कर जा चुके हैं। राजेंद्र ने कहा कि उनके लिए सभी पार्षद बराबर हैं और वे काम करवाना चाहते हैं, लेकिन आपसी कलह और प्रशासनिक तबादलों ने हाथ बांध दिए हैं। दूसरी ओर, अनिल गर्ग ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि जब कनिष्ठ अभियंता ने एस्टीमेट ही तैयार नहीं किए, तो वे हस्ताक्षर किस पर करें? उन्होंने भेदभाव के आरोपों को निराधार बताया।

Advertisement
×