पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन उपवास स्वास्थ्य के लिए उत्तम : चन्द्रकान्त आर्य
आज आर्य समाज नरवाना द्वारा भाद्रपद पूर्णिमा के उपलक्ष में राजकीय महाविद्यालय नरवाना के आवासीय परिसर में पर्यावरण शुद्ध एवं समृद्धि के लिए हवन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में...
आज आर्य समाज नरवाना द्वारा भाद्रपद पूर्णिमा के उपलक्ष में राजकीय महाविद्यालय नरवाना के आवासीय परिसर में पर्यावरण शुद्ध एवं समृद्धि के लिए हवन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति एवं पर्यावरणीय प्रभाव का अवलोकन कर पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन उपवास स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है । सत्य ज्ञान को धारण कर सत्य अनुसार कर्म करना ही श्राद्ध कहलाता है।
अमावस्या और पूर्णिमा के अवसर पर आत्महत्या एवं सामाजिक अपराध बढ़ते हैं। इसका मूल कारण सूर्य, चंद्र, पृथ्वी का एक रेखा में होना है, जिससे जल तत्व का प्रभाव मन मस्तिष्क पर पड़ता है। मानसिक जिससे मानसिक तनाव बढ़ जाता है। इसके नियंत्रण के लिए ही ऋषियों ने अमावस्या और पूर्णिमा के दिन अल्पाहार या उपवास का विधान किया था। जीवित मां बाप और धार्मिक, विद्वान, ऋषि और मुनियों की श्रद्धा पूर्वक सत्य ज्ञानार्जन उपरांत सेवा स्रुषा करना ही श्राद्ध एवं तर्पण माना गया है।
पुरोहित मिथिलेश शास्त्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में दान का सर्वोत्तम योगदान है। ज्ञान का दान के साथ सामाजिक सांस्कृतिक धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए धन का दान भी करना चाहिए। धन से धर्म की रक्षा होती है और धर्म राष्ट्र की रक्षा के लिए समाज में श्रेष्ठ कार्य करने का आधार प्रदान करता है।
जयपाल सिंह आर्य ने कहा सर्वप्रथम श्रेष्ठ व्यक्ति का निर्माण करना चाहिए व्यक्ति से समाज समाज से राष्ट्र का निर्माण करना हम सब का नैसर्गिक उत्तरदायित्व है। आध्यात्मिक विकास अन्न, जल, वायु एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से हो रहा है अत: हमने अपने राष्ट्र के प्रति सदैव कृतज्ञ रहते रक्षा और सुरक्षा का उत्तरदायित्व नि: स्वार्थ भाव से निभाना चाहिए। इस अवसर पर परमजीत, संजीव, सोनू और स्नेहलता इत्यादि आर्य गण उपस्थित रहे।

