किसान आलू की फसल औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर
भावांतर भरपाई योजना में आलू का दाम 600 से बढ़ाकर 925 रुपए प्रति क्विंटल तय करे सरकार : राकेश बैंस
शाहाबाद क्षेत्र में किसानों को आलू की फसल पर भारी नुकसान हो रहा है। लागत 925 रुपए प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसान आलू मात्र 100 से 125 रुपए प्रति क्विंटल बेचने को मजबूर हैं। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश बैंस ने सरकार से अपील की कि भावांतर भरपाई योजना के तहत आलू का दाम 600 से बढ़ाकर 925 रुपए प्रति क्विंटल किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
बैंस ने कहा कि किसानों को आलू बेचने में काफी कठिनाई हो रही है, क्योंकि मंडी में आलू के बिकने का खर्च भी उत्पादन लागत में शामिल नहीं होता। इसके परिणामस्वरूप किसानों को कर्ज चुकाने में दिक्कतें आ रही हैं और उनका आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि भावांतर के पैसे जल्द किसानों के खाते में डाले जाएं।
इस मुद्दे पर प्रमुख आलू उत्पादक तरलोचन सिंह हांडा ने भी सहमति जताई और सुझाव दिया कि शाहाबाद में आलू आधारित लघु उद्योग स्थापित किए जाएं, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिले और युवाओं को रोजगार भी मिल सके।
मार्केट कमेटी के सचिव कृष्ण कुमार मलिक के अनुसार, इस समय आलू की कीमत 300-400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है, और आगामी दिनों में आलू की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है।
17 केयूके रणजीत 01 : शाहाबाद में जानकारी देते भाकियू नेता राकेश बैंस। -निस

