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महिलाओं के लिये मिसाल बनीं इलेक्ट्रिशियन सीमा

एक किडनी और अटूट हौसला : मुख्यमंत्री सैनी और सांसद किरण कर चुके सम्मानित

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करनाल की अल्फा सिटी के निर्माणाधीन मकान में काम करतीं सीमा।  -हप्र
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कैथल के रसीना की सीमा अपने हूनर से पुरुषों को भी पीछे छोड़ रही है। सीमा हजारों महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है। करनाल की अल्फा सिटी के एक निर्माणाधीन मकान में 2 बच्चों की मां सीमा फीटिंग का काम करती देखी जा सकती हैं। लोग उसके हौसले को सलाम कर रहे हैं। सोचने पर मजबूर होते है कि पुरुषों के वर्चस्व वाले काम को एक महिला बहुत अच्छे से कर रही है। सीमा ने बताया कि वे सबर्सिबल के काम में माहिर हैं। इसके अलावा घरों में फीटिंग से लेकर पंखे ठीक करना, बिजली का काम करना सब आसानी से कर सकती हैं। इसके लिए उन्होंने आईटीआई पुंडरी से 2 साल का कोर्स किया है। सीमा पिछले 5-6 वर्षों से खेतों में मोटर निकालने, ठीक करने और बोरवेल की वायरिंग जैसे कठिन काम आसानी से कर रही हैं। उनका कहना है काम छोटा या बड़ा नहीं होता, हिम्मत बड़ी होनी चाहिए। सीमा बताती हैं कि उनके पति संजीव शादी से पहले ही इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे। शादी के बाद जब पति काम पर चले जाते, तो घर में अकेलापन उन्हें कचोटता। इसी दौरान उन्होंने पति के साथ काम करने की इच्छा जताई और यहीं से कहानी ने नया मोड़ लिया। संजीव ने न सिर्फ उसका हौसला बढ़ाया, बल्कि आईआईटी से इलेक्ट्रिशियन का डिप्लोमा करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि उनकी एक ही किडनी है, वे भारी वजन नहीं उठा सकतीं। इसके लिए वे सहायक व पति संजीव की मदद लेती है।

सीमा  सिर्फ एक किडनी के सहारे जिंदगी और काम दोनों संभाल रही हैं। भारी वजन उठाने का काम पति करते हैं, बाकी तकनीकी काम सीमा बखूबी निभाती हैं। काम के दौरान लोग उन्हें सम्मान से सरदार कहकर बुलाते हैं। यह संबोधन उनके आत्मविश्वास और काबिलियत की पहचान बन चुका है। सीमा मलिक सिर्फ एक इलेक्ट्रिशियन नहीं, वह उस सोच को चुनौती हैं जो महिलाओं की ताकत को सीमित मानती है।

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बेटियों और महिलाओं का बनीं सहारा

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सीमा ने बताया कि जो महिला या बेटी आत्मनिर्भर बनना चाहती है, वह उन्हें नि:शुल्क काम सिखाती हैं। उसके बाद अपने खर्च पर बेटी या महिला को 50 हजार से एक लाख रुपए की सहायता करती हैं। सांसद किरण चौधरी और राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री नायब सैनी भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। सीमा के पति संजीव गर्व कहते हैं कि सीमा को काम सिखाया, लेकिन आज कई बार उसका काम देखकर मैं खुद हैरान रह जाता हूं। वह मुझसे भी बेहतर काम करती है।  संजीव ने बताया कि सीमा खुद ट्रैक्टर चलाकर खेतों में जाकर टीम के साथ टयूबवेलों की मोटर निकालती हैं और उसे ठीक करती हैं।

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