पानीपत जेल में शिक्षा व तकनीकी प्रशिक्षण से बदल रही बंदियों की सोच
आत्मनिर्भर व सम्मानजनक जीवन जीने की राह
हरियाणा में पानीपत जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के जीवन में सुधार लाने के लिए शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण की अनूठी पहल की जा रही है। इस प्रयास का उद्देश्य बंदियों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन जी सकें।
जेल में हत्या सहित गंभीर अपराधों में बंद कैदियों का रुझान भी अब शिक्षा की ओर बढ़ रहा है। जो बंदी पहले निरक्षर थे, वे अब पढ़ना-लिखना सीख रहे हैं, वहीं शिक्षित बंदी उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, केंद्र सरकार की उल्लास योजना के तहत अब तक 40 निरक्षर बंदियों का नामांकन किया जा चुका है, जबकि करीब 100 बंदी अभी भी निरक्षर हैं, जिनका पंजीकरण प्रक्रिया में है।
जिन बंदियों ने पहले कुछ कक्षाओं तक पढ़ाई की है, उन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) के माध्यम से 10वीं और 12वीं की शिक्षा दिलाई जा रही है। 10वीं में 73 और 12वीं में 29 बंदियों ने दाखिला लिया है। खास बात यह है कि शिक्षित बंदी ही अन्य बंदियों को पढ़ा रहे हैं।
इसके अलावा, 12वीं पास बंदी इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) से स्नातक कर रहे हैं। इनमें 24 बंदियों ने बीए और 6 ने बीकॉम में प्रवेश लिया है।
तकनीकी कौशल बढ़ाने के लिए 30 बंदियों को कंप्यूटर का बेसिक कोर्स कराया जा रहा है, जबकि आईटीआई के सहयोग से सिलाई और कारपेंटरी के एक वर्षीय कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं।
सामाजिक सुधार की दिशा में नई पहल
जेल अधीक्षक संजीव कुमार और उप अधीक्षक नवीन छिल्लर के अनुसार, यह पहल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है। उनका कहना है कि कौशल और शिक्षा प्राप्त कर बंदी जेल से बाहर निकलने के बाद अपना रोजगार शुरू कर सकेंगे और आत्मनिर्भर बन पाएंगे।

