Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

प्रशासनिक अनदेखी के विरोध में 'टीम चित्रा' के पार्षदों का वॉकआउट

नगर परिषद अम्बाला छावनी की बैठक में हंगामा

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
अम्बाला छावनी में पार्षद एजेंडा की कॉपी दिखाते टीम चित्रा के पार्षद। -हप्र
Advertisement

एजेंडा निर्माण में पार्षदों के प्रस्ताव गायब; 8 महीने बाद बैठक बुलाने पर किया सवाल

नगर परिषद अम्बाला छावनी की बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक हंगामेदार रही। 'टीम चित्रा' से जुड़े पार्षदों ने परिषद की कार्यप्रणाली और एजेंडा निर्माण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। पार्षद राहुल सोनकर (वीरू), संदीप शर्मा (दिप्पी पंडित), नीलम कश्यप और रणजीत कुमार (सोनू गुज्जर) ने आरोप लगाया कि परिषद के अधिकारी और सत्ताधारी संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रहे हैं।

Advertisement

पार्षद नीलम कश्यप ने कहा कि सभी पार्षदों से उनके वार्डों के विकास कार्यों के प्रस्ताव लिखित रूप में लिए गए थे, लेकिन एजेंडा सूची में उनका कोई भी प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया। उन्होंने इसे प्रशासनिक पक्षपात बताते हुए कहा कि यह स्थानीय स्वशासन की मूल भावना के विरुद्ध है। पार्षद रणजीत कुमार ने भी बैठक की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पार्षदों के मुद्दों को स्थान नहीं मिलता, तो ऐसी बैठक का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

Advertisement

पार्षद संदीप शर्मा (दिप्पी पंडित) ने कानूनी पहलुओं को उठाते हुए कहा कि हरियाणा नगरपालिका अधिनियम के अनुसार हर महीने एक बैठक होना अनिवार्य है, जबकि यह बैठक करीब 8 महीने के लंबे अंतराल के बाद बुलाई गई है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन क्यों किया गया और क्या इसकी सूचना सक्षम प्राधिकारी को दी गई थी? पार्षदों ने मांग की कि बैठक में उनके द्वारा दर्ज की गई असहमति को मिनट्स में शाब्दिक रूप से दर्ज किया जाए।

पारदर्शिता पर सवाल, अदालत जाने की चेतावनी दी

पार्षद राहुल सोनकर ने मांग की कि जुलाई 2025 में हुई पहली बैठक की कार्यवाही लिखने वाले अधिकारी का नाम सार्वजनिक किया जाए और उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कार्यवाही रजिस्टर एक सार्वजनिक दस्तावेज है और इसकी पारदर्शिता ही बैठक की वैधता तय करती है। पार्षदों ने दो टूक कहा कि यदि नियमानुसार बैठकों का संचालन नहीं हुआ और उनके विधिक अधिकारों का हनन किया गया, तो वे इस मामले को सक्षम प्राधिकारी से लेकर न्यायालय तक ले जाएंगे। अंत में "पारदर्शिता के अभाव" का हवाला देते हुए टीम चित्रा के सभी पार्षदों ने सामूहिक रूप से बैठक का बहिष्कार किया और सदन से बाहर निकल गए।

Advertisement
×