Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

चुलकाना के सरपंच पर मार्कशीट में फर्जीवाड़े का आरोप, केस दर्ज

गांव चुलकाना के सरपंच सतीश कुमार पर 10वीं कक्षा की 2 अलग-अलग मार्कशीट बनवाकर चुनाव और सरकारी लाभ लेने का आरोप लगा है। मामला तब उजागर हुआ जब सीएम विंडो में की गई शिकायत की जांच के दौरान सरपंच के...

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
सरपंच सतीश कुमार
Advertisement

गांव चुलकाना के सरपंच सतीश कुमार पर 10वीं कक्षा की 2 अलग-अलग मार्कशीट बनवाकर चुनाव और सरकारी लाभ लेने का आरोप लगा है। मामला तब उजागर हुआ जब सीएम विंडो में की गई शिकायत की जांच के दौरान सरपंच के चुनावी हल्फनामे और शैक्षणिक दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आईं। पुलिस ने सरपंच के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया। शिकायतकर्ता ऋषिपाल सैनी निवासी चुलकाना के अनुसार, सरपंच सतीश कुमार के पास एक ही शिक्षा बोर्ड से जारी 10वीं की 2 अलग-अलग मार्कशीट हैं, जिनमें न सिर्फ पास होने का वर्ष अलग है, बल्कि जन्मतिथि में करीब 11 साल का अंतर भी दर्ज है। पहली मार्कशीट 2004 की है जिसमें जन्मतिथि 2 मार्च 1984 और पिता का नाम मांगेराम है जबकि दूसरी मार्कशीट 2018 की है जिसमें जन्मतिथि 5 मई 1973 व पिता का नाम मंगा राम है।

शिकायत में आरोप है कि सरपंच ने अपनी सुविधा के अनुसार उम्र और विवरण बदलकर प्रशासन और चुनाव आयोग को गुमराह किया। मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सरपंच के चुनावी हल्फनामों की पड़ताल की गई। सतीश कुमार ने 2016 और 2022 में सरपंच पद का चुनाव लड़ा। 2022 के चुनावी हल्फनामे में उन्होंने खुद को 2018 में मैट्रिक पास बताया। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया कि अगर सतीश 2018 में ही 10वीं पास हुए हैं तो 2016 में सरपंच पद के चुनाव में कैसे उम्मीदवार बने, जबकि उस समय भी मैट्रिक पास होना अनिवार्य शर्त थी। यही विरोधाभास जांच एजेंसियों के लिए फर्जीवाड़े का सबसे मजबूत आधार बन गया।

Advertisement

शिकायतकर्ता ऋषिपाल सैनी ने मांग की कि सरपंच के दोनों शैक्षणिक प्रमाण पत्र रद्द किए जाएं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चुनाव लड़ने के आरोप में उन्हें पद से तत्काल बर्खास्त किया जाए। वहीं विवाद पर सफाई देते हुए सरपंच सतीश कुमार ने कहा कि 10वीं की मार्कशीट में जन्मतिथि गलत थी, इसलिये 2018 में दोबारा परीक्षा दी। अब सवाल ये है कि क्या यह जन्मतिथि सुधार का मामला है या चुनावी धोखाधड़ी का सुनियोजित खेल। हालांकि पुलिस जांच के बाद ही तय होगा कि चुलकाना का सरपंच कानून के कठघरे में टिकेगा या कुर्सी पर।

Advertisement

Advertisement
×