नितेश के घर जश्न, कल दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वागत
एशियन गेम्स की ग्रीको-रोमन कुश्ती में 64 साल बाद दिलाया रजत पदक
जापान में आयोजित एशियन गेम्स की ग्रीको-रोमन कुश्ती स्पर्धा में पानीपत के सेक्टर 6 निवासी युवा पहलवान नितेश सिवाच ने रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। ग्रीको-रोमन वर्ग में 64 साल का इंतजार खत्म करते हुए नितेश ने पदक जीतकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस शानदार सफलता के बाद पानीपत स्थित उनके आवास पर शुक्रवार को दिनभर बधाई देने वाले लोगों और रिश्तेदारों का तांता लगा रहा।
हालांकि परिजनों को इस बात का थोड़ा मलाल जरूर है कि नितेश फाइनल मुकाबले में जापानी पहलवान से मुकाबला हारकर स्वर्ण से चूक गए। नितेश 4 अक्तूबर की रात को स्वदेश लौटकर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जिनके स्वागत के लिए पूरा परिवार एयरपोर्ट जाएगा। माता गुणवती ने बताया कि वे अपने बेटे के लिए घर से विशेष तौर पर चुरमा, हलवा और खिचड़ी बनाकर साथ लेकर जाएंगी।
मूल रूप से सोनीपत जिले के गांव जागसी का यह परिवार पिछले 11-12 वर्षों से पानीपत में रह रहा है। सेक्टर 6 और तहसील कैंप के पास उनके परिवार की दूध की दो डेयरियां हैं, जिन्हें नितेश के पिता आनंद और चाचा नवीन संभालते हैं। परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि बेहद साधारण और मेहनतकश रही है, नितेश ने भी अपने पिता के साथ गांवों से आने वाले दूध को पानीपत के विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर जाकर वितरित करने में हाथ बंटाया है। नितेश का पूरा परिवार एक संयुक्त परिवार है, जिसमें दादा धर्मपाल, पिता आनंद, माता गुणवती, चाचा नवीन और चाची मनीषा शामिल हैं। नितेश की बड़ी बहन नैंसी की शादी हो चुकी है, जो खुद भी एक समय में कुश्ती की खिलाड़ी रही हैं। खेल की यह परंपरा परिवार की अगली पीढ़ी में भी जारी है, जहां चाचा नवीन के दोनों बेटे- सुशील और अंश भी खरखोदा के प्रताप स्कूल में पढ़ाई के साथ कुश्ती का कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।
संघर्ष भरा रहा सफर
पिता आनंद ने बताया कि नितेश ने अपनी स्कूली शिक्षा सोनीपत के खरखौदा स्थित प्रताप सिंह मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की और वहीं कुश्ती के शुरुआती दांव-पेंच सीखे। नितेश ने पहले भी कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पदक जीते हैं। वर्ष 2022 में उसका चयन भारतीय रेलवे में टीसी (टिकट कलेक्टर) के पद पर हो गया था। एशियन गेम्स की इस बड़ी प्रतियोगिता के लिए नितेश ने सोनीपत के बहालगढ़ स्थित साई केंद्र में अभ्यास किया था।

