कोऑपरेटिव सोसायटी का सहायक रजिस्ट्रार और इंस्पेक्टर रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
कैथल में विजिलेंस की कार्रवाई, पैक्स में नौकरी दिलवाने के नाम मांगे थे रुपये
रिश्वत लेने के आरोप में कोऑपरेटिव सोसाइटी के सहायक रजिस्ट्रार ऋषि महाजन व इंस्पेक्टर को विजिलेंस टीम ने गिरफ्तार किया है। टीम ने रजिस्ट्रार से 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया और इस मामले में संलिप्तता के आरोप में इंस्पेक्टर जसबीर को भी गिरफ्तार किया। विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह बताया कि गांव पाडला निवासी मांगेराम ने शिकायत दी थी कि वह अपने पोते अभिमन्यु को पैक्स में नौकरी दिलवाना चाहते थे। करीब 2 साल पहले पैक्स में भर्ती निकली थी, लेकिन नौकरी दिलाने के लिए अधिकारियों ने उनसे 1 लाख रुपये की मांग की थी। पोते की नौकरी के लिए उसने पहले ही 70 हजार रुपये इंस्पेक्टर जसबीर को दे दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने इसके बाद और अधिक रकम मांगनी शुरू कर दी। उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद एसीबी की टीम ने एक योजना बनाई। पीड़ित मांगेराम को 30 हजार रुपये देकर सहायक रजिस्ट्रार ऋषि महाजन के पास भेजा गया। जब ऋषि महाजन को पैसे सौंपे गए तो उसी समय विजिलेंस ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद टीम ने इंस्पेक्टर जसबीर को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों गिरफ्तार अधिकारियों से पूछताछ के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि दोनों अधिकारियों से पूछताछ जारी है। एसीबी जांच कर रही है कि कितने और युवाओं को नौकरी दिलाने के लिए रिश्वत ली गई थी और किन लोगों के साथ उनकी सांठ-गांठ थी।
अब तक 8-10 युवकों से ले चुके पैसे
मांगेराम ने आरोप लगाया कि पहले भी कई युवाओं को नौकरी लगवाने के लिए ऋषि महाजन और इंस्पेक्टर जसबीर ने रिश्वत ली थी। उन्होंने बताया कि 8 से 10 युवाओं ने इस प्रक्रिया के जरिए नौकरी पाई और इनमें से किसी से 2 लाख रुपये, किसी से 3 लाख रुपये लिए गए। शिकायतकर्ता ने बताया कि पहले भी कई युवाओं से रिश्वत लेकर नौकरी लगवाई गई थी। पिछले मामलों में पता चला कि आरोपी अधिकारियों ने कम पढ़े-लिखे युवाओं से बड़ी रकम लेकर उन्हें नौकरी दिलवाई थी। यह साफ संकेत है कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि दोनों अधिकारियों की लंबे समय से चल रही गतिविधियों का हिस्सा है।

