इतिहास को भूलने वाला समाज पतन की ओर बढ़ता है : कल्याण
बसताड़ा में आयोजित शौर्य दिवस समारोह में विस अध्यक्ष ने की शिरकत
करनाल-पानीपत की पावन भूमि का नाम जिस युद्ध और मराठों के वीरता के कारण इतिहास में दर्ज हुआ, उस तीसरे युद्ध के 265 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को बसताड़ा में शौर्य दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष एवं घरौंडा से विधायक हरविंद्र कल्याण ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। वहीं कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती और पूंडरी बनी के महंत बालेश्वर आनंद महाराज ने शिरकत की। कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय मराठा जागृति मंच और रोडमराठा एकता संघ के तत्वाधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र मराठा ने की। वीरेंद्र मराठा ने समारोह में पहुंचने पर मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों का स्मृति चिन्ह और शॉल भेंटकर स्वागत किया। मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र मराठा ने तीसरे युद्ध और युद्ध के बाद की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर अभी और शोध की आवश्यकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एंव हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि 14 जनवरी 1761 को इसी मैदान में जहां आज हम उपस्थित हैं, एक भयंकर युद्ध हुआ। एक विदेशी आक्रांता अहमदशाह अब्दाली द्वारा भारत की अस्मिता को ललकारा गया। वीर मराठों ने राष्ट्र की अस्मिता के लिए उसका दृढ़ता से सामना किया। उन्होंने कहा कि जो समाज पूर्वजों द्वारा किए गए अच्छे कार्यों को याद रखता है, वह समाज निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर रहता है। वहीं जो समाज अपने इतिहास को भूल जाता है, उसका धीरे-धीरे पतन हो जाता है। उन्होंने कहा कि मराठा जागृति मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र मराठा और इतिहासकार डॉ. वसंत राव मोरे के प्रयासों से समाज ने अपनी खोई हुई पहचान को पुन: प्राप्त करने का प्रयास किया है। मौके पर धर्मवीर मिर्जापुर अध्यक्ष पशुधन विकास बोर्ड, पूर्व विधायक रणधीर गोलन, मिलिंद पाटील व महाराष्ट्र मराठा जागृति मंच के संस्थापक सदस्य राजेश कल्याण कुटेल ने भी अपने विचार रखे।
'मराठा सेना का मुख्य केंद्र बसताड़ा की भूमि रही'
मराठा जागृति मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र मराठा ने कहा कि 265 वर्ष पहले यहां इतना भयंकर युद्ध हुआ, आज उसे याद करने में रूह कांप उठती है। इतिहासकारों के अनुसार ये सच्चाई सामने आ चुकी है कि इस युद्ध में मराठा सेना का मुख्य केंद्र बसताड़ा की यही बलदानी भूमि थी। यहां एक पर्यटन व भव्य स्मारक बनाने का प्रयास जरूर होना चाहिए।

