चेयरपर्सन शकीला की अध्यक्षता में मंगलवार को पंचायत समिति की बैठक हुई, जिसमें नियमों का सख्त पालन किया गया। बैठक प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से काफी हद तक मुक्त रही। बैठक में कुछ सदस्यों के परिजनों को बतौर प्रतिनिधि आधिकारिक चर्चा में शामिल होने से रोक दिया गया। बाद में उन्हें केवल कार्रवाई देखने की अनुमति दी गई। बैठक में कुल 30 में से 18 सदस्य उपस्थिति थे, करीब पांच घंटे तक चली बैठक में लंबे समय बाद सभी विकास संबंधी प्रस्तावों को तुरंत कार्रवाई रजिस्टर में दर्ज किया गया। पिछले साल 13 मार्च की बैठक में बिना एजेंडा दर्ज किए गए 7 विवादित प्रस्तावों के मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। बीडीपीओ ने इसे अपने कार्यकाल से पूर्व का मामला बताते हुए जांच के लिए औपचारिक शिकायत मांगी, जबकि सदस्यों ने दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की मांग रखी। बैठक के दौरान उक्त प्रस्तावों में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई को लेकर संशय बना रहा। उल्लेखनीय है कि 10 सितंबर 2025 की बैठक में इसी मुद्दे को लेकर भारी हंगामा हुआ था। उस दौरान भोजराज, बलवीर, रेखा रानी, वीरपाल कौर, ममता रानी, मोहन लाल और सुभाष सहित कई सदस्यों के विरोध के चलते चेयरपर्सन और तत्कालीन बीडीपीओ को बैठक बीच में छोड़नी पड़ी थी। बीडीपीओ हरीश कुमार ने कहा कि पुराने मामलों की जांच के लिए लिखित शिकायत आवश्यक है, जबकि समिति सदस्य भोजराज व अन्य ने सिर्फ आश्वासन के बजाय समयबद्ध ठोस कार्रवाई की मांग दोहराई।
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