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एलपीजी की कमी से पर्यटन उद्योग ख़ौफ में

राजमा और काबुली चना गायब हुए मेन्यू से

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14 दिनों से जारी ईरान युद्ध के चलते आई रसोई गैस किल्लत से हिमाचल के पर्यटन कारोबारी खौफ में हैं। एक ओर जहां युद्ध लंबा खिंचने की स्थिति में कारोबारियों को ग्रीष्मकालीन पर्यटक सीजन प्रभावित होने का खौफ सताने लगा है, वहीं दूसरी ओर एलपीजी की संभावित किल्लत के अंदेशे से भी कारोबारी घबराए हुए हैं। हालांकि प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता का कहना है कि कारोबारियों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल व डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। एलपीजी सिलेंडर की संभावित कमी की आशंका के चलते राजधानी शिमला में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों ने अपने मेन्यू में कटौती शुरू कर दी है। लंबे समय में पकने वाले व्यंजन जैसे राजमा और काबुली चना फिलहाल मेन्यू से हटा दिए गए हैं। शहर के कुछ ढाबों पर ताले भी लटक गए हैं। लक्कड़ बाजार में दो ढाबे बंद हो गए हैं। ढाबा संचालक लक्ष्मीकांत के अनुसार वह बीते 20 वर्षों से यहां ढाबा चला रहे हैं लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं आई। सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण उन्हें गुरुवार शाम से ढाबा बंद करना पड़ा। होटल कारोबारियों के अनुसार एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक नहीं बचा है। लिहाजा कई जगह एडवांस बुकिंग भी रद्द करनी पड़ रही है। शिमला के लैंडमार्क होटल के मालिक राजीव भारद्वाज ने बताया कि पिछले चार-पांच दिनों में उनकी करीब 50 प्रतिशत एडवांस बुकिंग रद्द हो चुकी है। नतीजतन लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों में भी स्थिति को लेकर अनावश्यक घबराहट देखी जा रही है। राजीव भारद्वाज ने बताया कि पर्यटकों को परेशानी से बचाने के लिए होटल में लकड़ी के चूल्हे लगवाए गए हैं और इंडक्शन भी मंगवाए गए हैं। इसके साथ ही मेन्यू में बदलाव करते हुए ऐसे व्यंजन शामिल किए गए हैं जो कम समय में तैयार हो जाते हैं। इधर हिमाचल होटलियर एसोसिएशन ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो समर सीजन में पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। इसका सीधा असर प्रदेश की आर्थिकी पर पड़ेगा।

प्रदेश में फिलहाल स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल नहीं

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एलपीजी संकट को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि सरकार सभी हालातों की लगातार मॉनीटरिंग कर रही है। प्रदेश में फिलहाल स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के उपायुक्त, सिविल सप्लाई विभाग और तेल कंपनियों को लगातार स्थिति के बारे में अपडेट करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में एलपीजी की आपूर्ति को लगातार मॉनीटर कर रही है। उन्होंने कहा कि इस बारे में केंद्र सरकार भी गंभीर है। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से मॉनिटरिंग की जा रही है। बीते कल ही होम सेक्रेटरी की ओर से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि गैस आपूर्ति का मामला केंद्र सरकार के अधीन है और केंद्र ने डॉमेस्टिक एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता बनाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के पास कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी उपलब्ध थेए उन्हें होटल और फूड इंडस्ट्री से जुड़े लोगों तक पहुंचाने के लिए कहा गया है।

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आपूर्ति निरंतर जारी

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि शुक्रवार को गैस सिलेंडर की आपूर्ति के लिए जिला शिमला के सभी उपमंडलों में 14 गाड़ियां भेजी गई हैं।उन्होंने कहा कि जिला में कहीं भी घरेलु गैस, पेट्रोल, डीजल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति निरंतर जारी है। इसीलिए लोग इन चीज़ों का अनावशयक भण्डारण न करें। बैठक में बताया गया कि आज जिला के लिए 4488 घरेलू गैस सिलेंडर प्राप्त हुए थे जिनमें से 4249 जिला के विभिन्न क्षेत्रों में भेजे गए हैं। इसके अतिरिक्त, जिला में अभी भी 8382 घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं। इसी प्रकार, जिला में 521 वाणिज्यिक सिलेंडर भेजे गए हैं और 499 अभी और उपलब्ध हैं जिनकी आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर केवल अस्पतालो एवं शैक्षणिक संस्थानों को की जा रही है।

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