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रामपुर बुशहर की तीन पंचायतों ने पेश की लोकतंत्र की अनूठी मिसाल

निर्विरोध चुने गए प्रधान-उपप्रधान, सरकार देगी 25 लाख रुपये का विकास अनुदान

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जहां पंचायत चुनावों में प्रत्याशी वोट मांगने के लिए गांव-गांव प्रचार में जुटे हैं, वहीं रामपुर बुशहर उपमंडल की तीन दुर्गम पंचायतों ने बिना मतदान कराए ही अपने जनप्रतिनिधि चुनकर लोकतंत्र की अनूठी मिसाल पेश की है।

रामपुर बुशहर उपमंडल की कूट, बधाल और ननखड़ी ब्लॉक की शोली पंचायत में ग्रामीणों ने आपसी सहमति से प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों का चयन किया। इन पंचायतों में किसी प्रकार का मतदान नहीं हुआ और सभी प्रतिनिधि निर्विरोध चुने गए। सरकार की नीति के अनुसार निर्विरोध पंचायत बनने पर प्रत्येक पंचायत को 25 लाख रुपये का अतिरिक्त विकास अनुदान मिलेगा।

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नाम वापसी के दिन बनी सहमति

शुक्रवार को नामांकन वापसी का अंतिम दिन था। उपमंडल की कई पंचायतों में बैठकों का दौर चला, लेकिन 57 पंचायतों में से केवल कूट, बधाल और शोली पंचायतों में सर्वसम्मति बन सकी। इसके बाद सभी प्रत्याशी निर्विरोध घोषित कर दिए गए।

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कूट पंचायत में सुषमा देवी बनीं प्रधान

कूट पंचायत में ग्रामीणों ने सुषमा देवी को प्रधान और विक्रम सिंह को उपप्रधान चुना। वहीं सीमा रानी, राजेश कुमार, संतोष कुमारी, राधा देवी और यशवंत सिंह वार्ड सदस्य बने।

शोली पंचायत में हिंऊं दासी को मिली जिम्मेदारी

शोली पंचायत में हिंऊं दासी को प्रधान तथा प्रदीप चंद को उपप्रधान चुना गया। इसके अलावा बिट्टू, शकुंतला, सोनिया, प्रियावती, महेंद्र, सुंदर सिंह और लता देवी वार्ड सदस्य निर्विरोध चुने गए।

बधाल पंचायत ने भी दिखाई एकजुटता

बधाल पंचायत के ग्रामीणों ने भी आपसी सहमति से अपने जनप्रतिनिधियों का चयन किया। पंचायत में निर्विरोध चुनाव होने से क्षेत्र में एकता और सहयोग की भावना देखने को मिली।

गांवों में जश्न का माहौल

निर्विरोध चुनाव के बाद तीनों पंचायतों में ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई। ग्रामीणों का कहना है कि आपसी सहमति से प्रतिनिधि चुनने से चुनावी विवाद और खर्च दोनों से बचाव हुआ है।

रामपुर बुशहर और ननखड़ी क्षेत्र की इन पंचायतों ने यह संदेश दिया है कि यदि गांव एकजुट हों तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सहमति और सौहार्द के साथ भी सफल बनाया जा सकता है।

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