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विधानसभा अध्यक्ष ने 210 विद्यार्थियों को समझाई संसदीय प्रणाली, कौंसिल चैम्बर के इतिहास से भी कराया रूबरू

लोकतंत्र की मजबूती के लिए युवा पीढ़ी की भागीदारी जरूरी : पठानियां

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Himachal News : हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने कहा है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा और सशक्त लोकतंत्र है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए युवा पीढ़ी का संसदीय प्रणाली और लोकतंत्र की बुनियादी कार्यप्रणाली से परिचित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर हैं, जहां जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि जनहित के मुद्दों पर चर्चा करते हैं और नीतियां तय करते हैं।

बुधवार को राजकीय महाविद्यालय चुवाड़ी (चंबा), राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला स्पाटू (सोलन), राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टूटू-कंडा, सेंट बीड्स कॉलेज संजौली और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलदया (शिमला) के करीब 210 विद्यार्थियों ने विधानसभा सचिवालय पहुंचकर कौंसिल चैम्बर के बाहर विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की। इस दौरान पठानियां ने विद्यार्थियों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संसद और विधानसभा की कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी दी।

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उन्होंने कहा कि लोकसभा में चुने गए सांसदों से केंद्र की सरकार का गठन होता है और बहुमत वाले दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है। वहीं राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य करते हैं। राज्यसभा को उच्च सदन और लोकसभा को निचला सदन कहा जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि बड़े राज्यों में विधान परिषद का प्रावधान है, लेकिन हिमाचल छोटा राज्य होने के कारण यहां विधान परिषद नहीं है। पठानिया ने विद्यार्थियों को विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि लोकतंत्र को समझने का सबसे बेहतर माध्यम उसकी कार्यप्रणाली को करीब से देखना है।

इतिहास का गवाह है कौंसिल चैम्बर

सेंट बीड्स कॉलेज की छात्राओं से संवाद के दौरान पठानियां ने कौंसिल चैम्बर के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इस भवन का निर्माण 1920 में शुरू होकर 1925 में पूरा हुआ था। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने करीब 10 लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण राष्ट्रीय असेंबली के लिए किया था। उन्होंने कहा कि यह भवन देश के संसदीय इतिहास की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। वर्ष 1925 में विट्ठल भाई पटेल ने अपने ब्रिटिश प्रतिद्वंद्वी को दो मतों से हराकर राष्ट्रीय असेंबली के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल किया था। महिलाओं को मताधिकार देने तथा भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों सहित कई ऐतिहासिक घटनाओं की यादें इस भवन से जुड़ी हैं।

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