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सेना ने 50 हजार से ज्यादा जवानों को दी ड्रोन ऑपरेशन ट्रेनिंग

आरट्रेक शिमला में अलंकरण समारोह

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ड्रोन की फाइल फोटो
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जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ़, लेफ्टिनेंट जनरल आर्मी ट्रेनिंग कमांड(आरट्रेक) देवेंद्र शर्मा ने कहा है कि आज के युद्ध में आधुनिक तकनीकों के महत्व और ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सेना ने 50,000 से ज़्यादा जवानों को पहले ही ड्रोन ऑपरेशन में ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

आरट्रेक शिमला में मंगलवार को आयोजितअलंकरण समारोह 2026 की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने विशेषज्ञता केंद्र विकसित करने, ऑनलाइन ट्रेनिंग और परीक्षा प्रणाली शुरू करने तथा लैंगिक समानता तथा सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी ज़िक्र किया। इस कार्यक्रम के दौरान ट्रेनिंग संस्थानों और जवानों को ट्रेनिंग वर्ष 2025–26 में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ़ यूनिट प्रशस्ति पत्र आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, आर्मर्ड कोर सेंटर एंड स्कूल, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल और राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, तथा दो संबद्ध इकाइयों को प्रदान किया गया।

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वित्तीय उत्कृष्टता, डिजिटलीकरण और तकनीकी नवाचार के लिए भी पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा, 16 व्यक्तियों को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र मिले। पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए, शर्मा ने उनके समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना की। उन्होंने सभी जवानों को लगातार सीखते रहने, नई चुनौतियों के अनुसार ढलने और नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि आरट्रेक एक आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना बनाने तथा 'विकसित भारत 2047' के विज़न में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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