Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

आरडीजी बंद होने से परेशानी में सुक्खू सरकार

केंद्र के सामने नया पक्ष रखने की तैयारी । वित्तीय दबाव बढ़ा, 8 फरवरी को कैबिनेट में मंथन

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
पटना में बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम के दौरान हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ। -एएनआई
Advertisement

16वें वित्तायोग की सिफारिशों के तहत रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद किए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार गहरे वित्तीय दबाव में आ गई है। सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए आरडीजी को अब तक बड़ा सहारा माना जाता रहा है। इसके बंद होने से प्रदेश की आर्थिक चुनौतियां बढ़ गई हैं और सरकार इनसे निपटने के लिए नए विकल्पों की तलाश में जुट गई है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार आरडीजी समाप्त होने के मुद्दे के साथ-साथ प्रदेश की समग्र वित्तीय स्थिति को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रही है। 16वें वित्तायोग की रिपोर्ट के बाद न केवल हिमाचल बल्कि कई अन्य राज्यों को मिलने वाला आरडीजी बंद हुआ है। इसके साथ ही केंद्रीय विभाज्य कर पूल से हिमाचल को मिलने वाली हिस्सेदारी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई और ग्रीन बोनस की राज्य की मांग को भी मंजूरी नहीं मिली। ऐसे में सरकार विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) का मुद्दा उठा सकती है।

Advertisement

आरडीजी बंद होने से उत्पन्न हालात पर मंथन के लिए सरकार ने आठ फरवरी को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। हालात की गंभीरता इसी से समझी जा रही है कि संभवत: यह प्रदेश की पहली कैबिनेट बैठक होगी, जो रविवार को आयोजित की जाएगी। बैठक में प्रति वर्ष करीब दस हजार करोड़ रुपये के आरडीजी के बंद होने से होने वाले असर, खर्च नियंत्रण और संभावित कानूनी विकल्पों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। ने इस विषय पर प्रधान सचिव वित्त और वित्त विभाग की टीम के साथ चर्चा की है। इसके अलावा पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना से भी वित्तीय हालात को लेकर परामर्श किया गया है।

Advertisement

केंद्र को दोष न दें : जयराम ठाकुर

इस मामले पर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ने के बजाय राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय दी गई गारंटियों को पूरा न कर पाने की जिम्मेदारी केंद्र पर डालना उचित नहीं है। जयराम ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई रोजगार एवं आजीविका योजना के तहत बड़े बजटीय प्रावधान किए हैं।

आरडीजी अस्थायी थी’ : अनुराग ठाकुर

हमीरपुर (निस) : भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी मुख्यमंत्री के बयानों को भ्रामक करार दिया। उन्होंने कहा कि आरडीजी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी, बल्कि एक अस्थायी प्रावधान था। उनके अनुसार 16वें वित्तायोग के नए फार्मूले के तहत हिमाचल की हिस्सेदारी घटी नहीं, बल्कि बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की कमजोर कर वसूली, बढ़ते खर्च और वित्तीय कुप्रबंधन के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराना गलत है। कुल मिलाकर आरडीजी को लेकर उठे इस मुद्दे ने हिमाचल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

Advertisement
×