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शिमला नगर निगम में बजट पेश करने पर विवाद, भाजपा पार्षदों का वाकआउट

मेयर और डिप्टी मेयर के कार्यकाल को लेकर जताई आपत्ति

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शिमला नगर निगम के बजट सत्र की शुरुआत हंगामे के साथ हुई, जब भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने मेयर सुरेंद्र चौहान द्वारा बजट पेश किए जाने का कड़ा विरोध किया और सदन से वाकआउट कर दिया। भाजपा पार्षदों ने मेयर से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग भी उठाई।

सत्र शुरू होते ही भाजपा पार्षदों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि सरकार ने अब तक मेयर के कार्यकाल विस्तार की अधिसूचना जारी नहीं की है। उनका कहना था कि आरक्षण रोस्टर के अनुसार मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष का होता है और मौजूदा स्थिति में मेयर का पद तकनीकी रूप से रिक्त माना जाना चाहिए। ऐसे में बजट पेश करना संवैधानिक रूप से उचित नहीं है।

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मेयर के बजट भाषण शुरू करते ही भाजपा पार्षद सदन से बाहर चले गए और प्रस्तावित बजट को अमान्य करार दिया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि निगम पहले से कर्ज में डूबा है और आय के पर्याप्त स्रोत नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके वार्डों में विकास कार्यों की अनदेखी की जा रही है।

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