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उच्चतम वेतनमान को वापस लेने वाली अधिसूचना पर लगाई स्थाई रोक

हिमाचल हाई कोर्ट में सुनवाई

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार द्वारा कर्मचारियों को वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत दिए जाने वाले उच्चतम वेतनमान को वापिस लेने वाली अधिसूचना पर स्थाई रोक लगा दी है। 6 सितम्बर 2025 को जारी इस अधिसूचना के माध्यम से 3 जनवरी 2022 को जारी अधिसूचना के तहत दिए गए उच्चतम पे स्केल को सरकार ने वापिस ले लिया था। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के पश्चात इस अधिसूचना के अमल पर स्थाई रोक लगाने के आदेश जारी किए।

हिमाचल हाई कोर्ट ने 9 सितंबर को सरकार को नोटिस जारी किया था और सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया था। इस बार फिर सरकार की ओर से जवाब दायर करने के लिए समय की मांग की गई। इसलिए कोर्ट ने चार सप्ताह का अतिरिक्त समय देने के आदेश दिए। याचिकाकर्ताओं को भी सरकार के जवाब का जवाब दायर करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया गया है।

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ट्रेनी नाम देने के कारण बताए सरकार

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हिमाचल सरकार ने नवनियुक्त डॉक्टरों को ट्रेनी नाम देने के कारणों को बताने के लिए प्रदेश हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की है। एक महीने पहले हाईकोर्ट ने नए नियुक्त डॉक्टरों की नियुक्ति को ट्रेनी डॉक्टर का नाम देने पर गम्भीर आपत्ति जताई थी और राज्य सरकार से पूछा था कि लम्बी व कठिन पढ़ाई कर बने डॉक्टरों को ट्रेनी ठहराने के पीछे क्या कारण है। क्या सरकार को नहीं पता कि एक व्यक्ति डॉक्टर कैसे बनता है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा था कि अगर सरकार की राज्य के निवासियों को उचित स्वास्थ्य सेवा देने की इच्छा है, तो डॉक्टरों को सेवा सुरक्षा दी जानी जरूरी है। इसलिए उनके लिए 'ट्रेनी' नाम सही नहीं बैठता।

एक ट्रेनी डॉक्टर से कौन सा मरीज भारी भरकम खर्च कर अपना इलाज करवाना चाहेगा। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिए थे कि कोर्ट को 'ट्रेनी' मेडिकल अधिकारियों का पे-स्केल दिखाया जाए। एक माह बीत जाने पर भी सरकार कोर्ट के सवालों का जवाब नहीं दे पाई और अतिरिक्त समय की मांग की गई जिसे स्वीकारते हुए कोर्ट ने मामले की सुनवाई शीतकालीन छुट्टियों के चलते 6 अप्रैल को निर्धारित करने के आदेश जारी किए। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि मेडिकल ऑफिसर को ट्रेनी' नाम दिया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस बात पर नोटिस जारी कर पूछा था कि वह बताए कि यह नाम क्या है और क्या ये डॉक्टर नियमित पे-स्केल पा रहे हैं और नियमित कैडर में हैं या नहीं। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को यह आदेश दिए कि वह नियमित कैडर में खाली पदों की संख्या के बारे में विवरण दें।

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