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पेंशनरों का विधानसभा के बाहर प्रदर्शन

बकाया देनदारियां जल्द चुकाने की मांग

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शिमला में मंगलवार को प्रदेशभर से पहुंचे पेंशनरों ने विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। पेंशनरों ने सरकार से लंबे समय से लंबित अपनी देनदारियों का जल्द भुगतान करने और 16 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन में पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन समेत विभिन्न सहयोगी संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए।

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हिमाचल प्रदेश में करीब दो लाख पेंशनर हैं। विभिन्न पेंशनर संगठनों की ओर से सरकार को 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा जा चुका है, लेकिन इन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उनका आरोप है कि जनवरी 2016 से जनवरी 2022 तक के संशोधित वेतनमान के एरियर, कम्यूटेशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण की राशि अभी तक लंबित है। पेंशनरों के मुताबिक, प्रत्येक पेंशनर की करीब 20 से 35 लाख रुपये तक की देनदारी सरकार के पास बनती है। इसके अलावा जुलाई 2023 से 15 फीसदी महंगाई भत्ता भी लंबित है। यह राशि न तो पेंशन में जोड़ी गई है और न ही इसका एरियर जारी किया गया है।

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पेंशनरों ने मेडिकल प्रतिपूर्ति का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि कई बुजुर्ग पेंशनरों के मेडिकल बिलों का भुगतान लंबे समय से लंबित है। कई पेंशनरों की करीब 50 से 60 हजार रुपये तक की मेडिकल देनदारी सरकार के पास अटकी हुई है। पेंशनरों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर कई बुजुर्ग हड्डियों के दर्द, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार को बुजुर्गों की स्थिति को देखते हुए लंबित मेडिकल प्रतिपूर्ति का जल्द भुगतान करना चाहिए।

\B98 साल के बुजुर्ग और 92 साल की महिलाएं भी पहुंचीं\B

प्रदर्शन के दौरान अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए 98 साल के बुजुर्ग और 92 साल की महिलाएं तक विधानसभा के बाहर पहुंचने को मजबूर हुए। पेंशनर संगठनों के अनुसार, अपनी देनदारियों के इंतजार में करीब 6 से 7 हजार पेंशनरों की मृत्यु भी हो चुकी है। पेंशनरों का कहना है कि यह सिर्फ दो लाख पेंशनरों का मुद्दा नहीं है। इसका असर प्रदेश के करीब तीन लाख कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पेंशनरों की सभी लंबित देनदारियों का जल्द निपटारा किया जाए और 16 सूत्रीय मांग पत्र पर ठोस कार्रवाई की जाए।

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