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हिमाचल में कुलपतियों की नियुक्ति के नये नियम अधिसूचित

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य के कृषि, औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर नये नियम अधिसूचित कर दिए हैं। राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1986 की धारा 55(क) के...

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हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य के कृषि, औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर नये नियम अधिसूचित कर दिए हैं। राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1986 की धारा 55(क) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह अधिसूचना जारी की है। इन नियमों को हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय नियम, 2026 नाम दिया गया है, जो प्रदेश के राजपत्र (ई-गजट) में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी होंगे।नये नियमों के तहत डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोलन और हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया, योग्यता, कार्यकाल और अधिकारों को स्पष्ट किया गया है। अधिसूचना के अनुसार, कुलपति की नियुक्ति राज्य सरकार के परामर्श पर राज्यपाल द्वारा की जाएगी।

नियमों में कुलपति के चयन के लिए खोज एवं चयन समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। समिति में राज्य के मुख्य सचिव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक या उनके नामित प्रतिनिधि, राज्य सरकार द्वारा नामित वरिष्ठ शिक्षाविद तथा कृषि, औद्यानिकी या पशु चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति आवेदन आमंत्रित कर पात्र अभ्यर्थियों का चयन करेगी और तीन नामों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगी। राज्य सरकार इस पैनल में से एक नाम का चयन करेगी। कुलपति का कार्यकाल सामान्य रूप से तीन वर्ष का होगा और नियमों के तहत पुनर्नियुक्ति का भी प्रावधान रखा गया है। पात्रता के लिए अभ्यर्थी का विश्वविद्यालय या अनुसंधान संस्थान में प्रोफेसर या वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में कम से कम दस वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य होगा।

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