Mountain Environmental Crisis: विकास की अंधी दौड़ ने पहाड़, नदियों और इंसान को संकट में धकेला : साहित्यकार
‘नदी-रंग जैसी लड़की’ पर आलोचना कृति का लोकार्पण; शिमला में पेट्रोल-डीजल वाहनों पर रोक लगाने की मांग
Mountain Environmental Crisis: विकास के नाम पर पहाड़ों, नदियों और पर्यावरण से हो रही छेड़छाड़ आखिरकार इंसान के लिए ही त्रासदी बन रही है। प्रख्यात कथाकार एस.आर. हरनोट के बहुचर्चित उपन्यास ‘नदी-रंग जैसी लड़की’ पर केंद्रित आलोचना कृति के लोकार्पण समारोह में साहित्यकारों ने शुक्रवार को शिमला में हिमालयी क्षेत्रों में अनियोजित और अवैज्ञानिक विकास पर तीखे सवाल उठाए। साथ ही शिमला में पेट्रोल और डीजल वाहनों का परिचालन चरणबद्ध ढंग से बंद कर इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ऊर्जा आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की जोरदार मांग की।
ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा आयोजित समारोह में न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन से प्रकाशित आलोचना कृति का लोकार्पण डॉ. राजेंद्र बड़गूजर, वरिष्ठ कवि-आलोचक राकेशरेणु, पत्रकार एवं साहित्य मीमांसक जय प्रकाश पांडेय और प्रकाशक एम.एम. चंद्रा ने किया।
डॉ. बड़गूजर ने कहा कि ‘नदी-रंग जैसी लड़की’ पहाड़ी जीवन, लोक-संस्कृति, स्त्री की जिजीविषा और पर्यावरण विनाश को केंद्र में रखकर हमारे समय के गंभीर संकटों को सामने लाने वाला महत्वपूर्ण उपन्यास है। उन्होंने कहा कि इसमें नदी और स्त्री दोनों के संघर्ष के माध्यम से तथाकथित विकास की विनाशकारी कीमत को रेखांकित किया गया है।
राकेशरेणु और जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि हिमाचल की नाजुक पर्यावरणीय व्यवस्था को बचाने के लिए अब केवल चिंता नहीं, ठोस फैसलों की जरूरत है। उन्होंने शिमला प्रशासन से पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने और इसकी शुरुआत सरकारी बेड़े से करने की अपील की।
डॉ. मीनाक्षी एफ. पॉल ने बताया कि वह उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद कर रही हैं। वर्ष 2022 में प्रकाशित उपन्यास के तीन संस्करण आ चुके हैं और इसे बीदर यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है। समारोह में साहित्यकारों, विद्यार्थियों और पाठकों की भारी उपस्थिति रही।

