Himachal News : चक्की मोड़ पर पहाड़ी का हिस्सा खिसका, धरे रह गए NHAI के इंतजाम
नहीं रूक पाया पहाड़ी का खिसकना, बरसात आते ही सताने लगता है डर
Himachal News : नेशनल हाईवे-5 पर चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाईवे पर चक्की मोड़ (Landslide at Chakki Mor) के समीप पहाड़ी का हिस्सा बार-बार खिसकने से एनएचएआई की ओर से किए गए सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं। पहाड़ी को स्थिर रखने के लिए ग्रीन मेश नेटिंग, सॉइल नेलिंग समेत कई सुरक्षा कार्य किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद नेटिंग के पीछे से मिट्टी और पत्थरों के खिसकने का सिलसिला जारी है।
सामान्य बारिश में भी एनएच पर आ जाता है मलबा
कई स्थानों पर ढलान से मिट्टी बाहर आ गई है, जबकि बड़े पत्थर सड़क के किनारे तक पहुंच रहे हैं। चिंता की बात यह है कि हाल में पहाड़ी का हिस्सा खिसकने के दौरान क्षेत्र में मूसलाधार बारिश भी नहीं हो रही थी। सामान्य बारिश के बीच ही मलबा हाईवे तक पहुंच गया। ऐसे में लगातार तेज बारिश होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। नेशनल हाईवे-5 पर दिनभर बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में पहाड़ी से अचानक पत्थर या मलबा सड़क पर आने से वाहन चालकों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
नेटिंग से नहीं थमेगा खतरा
चक्की मोड़ का यह क्षेत्र लंबे समय से भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञ दृष्टिकोण से ढलान को सुरक्षित रखने के लिए केवल सतह पर सुरक्षा जालियां लगाना पर्याप्त नहीं हो सकता। पहाड़ी के भीतर पानी के रिसाव, जल दबाव और जल निकासी की स्थिति का तकनीकी अध्ययन भी जरूरी है। यदि पानी लगातार पहाड़ी के भीतर प्रवेश कर रहा है तो नेटिंग और सॉइल नेलिंग के पीछे मौजूद मिट्टी व चट्टानों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में पहाड़ी को दीर्घकालिक रूप से स्थिर करने के लिए प्रभावी जल निकासी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
तीन साल पहले भी उठ चुका है जल निकासी का मुद्दा
अगस्त 2023 में प्रकाशित एक ग्राउंड रिपोर्ट में भी चक्की मोड़ क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार कालका-शिमला रेलवे लाइन की सुरंग और पहाड़ी से पानी की निकासी के लिए अंग्रेजों के समय पत्थरों से बनी करीब चार से पांच फुट चौड़ी खुली नालियां और पुलिया बनाई गई थी। बरसाती पानी को दूसरी दिशा में मोड़कर कौशल्या खड्ड तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी। रेलवे लाइन और सुरंग के आसपास आज भी पुरानी जल निकासी व्यवस्था के अवशेष दिखाई देते हैं। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में पहाड़ी के भीतर पानी के रिसाव और जल निकासी की स्थिति का तकनीकी आकलन महत्वपूर्ण हो गया है।
चक्की मोड़ में ड्रोन सर्वे शुरू....
चक्की मोड़ में पहाड़ी को सुरक्षित करने के लिए एनएचएआई ने ड्रोन सर्वे शुरू कराया है। ड्रोन के माध्यम से पहाड़ी के ऊपरी हिस्सों का निरीक्षण कर मलबा गिरने और पानी के बहाव वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान की जा रही है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में मैनुअल तरीके से पहुंचना मुश्किल है। इसी कारण विशेषज्ञ ड्रोन सर्वे टीम को हायर किया गया है। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर डिजाइन टीम तकनीकी जांच करेगी और इसके बाद पहाड़ी को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक सुरक्षा कार्यों की योजना तैयार की जाएगी। बरसात के बाद इन कार्यों को शुरू किए जाने की उम्मीद है।

