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हिमाचल में वेतन-पेंशन पर संकट, कर्ज चुकाने के भी पैसे नहीं

केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान बंद ; वित्त सचिव ने पेश की आर्थिक संकट की तस्वीर

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हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर शिमला में रविवार को प्रस्तुति के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और अन्य। -ललित कुमार
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हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के साथ ही राज्य में सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और डीए पर संकट पैदा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा रविवार को यहां प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर पेश की गई तस्वीर से यह स्पष्ट हो गया है कि हिमाचल अत्यधिक गंभीर आर्थिक संकट में है और इससे बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता केंद्रीय 'बैसाखियां' ही हैं। केंद्र से विशेष मदद अथवा आरडीजी बहाली की राहत नहीं मिली तो हिमाचल के समक्ष प्रतिबद्ध देनदारियों के भुगतान के लिए भी पैसा नहीं होगा।

वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार के अनुसार 15वें वित्तायोग की सिफारिशों के तहत हिमाचल को 37,199 करोड़ आरडीजी के अलावा 9714 करोड़ के अन्य अनुदान मिले। लेकिन, 16वें वित्तायोग ने आरडीजी बंद कर दी है।

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देवेश कुमार के अनुसार प्रदेश का अपना राजस्व 18 हजार करोड़ है। खर्च 48 हजार करोड़ है। यह खर्च वेतन, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर होगा। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के एवज में हिमाचल को 13,950 करोड़ मिलेंगे। जीडीपी का 3 फीसदी ही सरकार कर्ज ले सकती है। यानी कर्ज से भी 10 हजार करोड़ की रकम ही खजाने में आएगी। ऐसी स्थिति में पूंजीगत खर्च के लिए धन कहां से आएगा? राजस्व व्यय 48 हजार करोड़ है। राजस्व प्राप्तियां करीब 42 हजार करोड़ हैं। इन दोनों में करीब 6 हजार करोड़ का अंतर है।

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खर्च में कटौती के सुझाव

वित्त सचिव का कहना है कि आरडीजी बंद होने से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए बिजली उपदान पर खर्च होने वाली 1200 करोड़ की रकम, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 1661 करोड़ के खर्च को सीमित करने के बारे में सोचना होगा। कर्मचारियों व पेंशनरों के डीए को लंबित करने, ओपीएस लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के मकसद से यूपीएस लागू करने के बारे में विचार करना होगा। 'एमआईएस' को बंद करने, 30 फीसदी संस्थानों को बंद करने और परिवहन निगम को मिलने वाले अनुदानों को सीमित करने के बारे भी सोचना होगा।

मंत्रिमंडल ने किया आरडीजी समाप्ति के बाद के हालातों पर मंथन

आर्थिक मोर्चे पर हिमाचल प्रदेश के समक्ष आगामी सालों मेें खड़ी होने वाली चुनौतियों से पार पाने के मुद्दे पर रविवार को सुक्खू मंत्रिमंडल की बैठक में शिमला में चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता की। मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि राज्य के संसाधन बढ़ाने के मकसद से वह फैसले लेंगे। साथ ही आरडीजी बहाली के मुद्दे पर केंद्र से एक बार फिर बात की जाएगी। उन्होंने इसके बाद साफ किया कि पावर प्रोजेक्टों पर लगने वाले भू राजस्व सेस से कितनी रकम खजाने में आएगी। कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि सरकार ने 3 हजार करोड़ का अतिरिक्त राजस्व कमाया है। फिर चाहे वह वाइल्ड फ्लावर हॉल केस जीतने के बाद राज्य के खजाने में आई 400 करोड़ की रकम हो अथवा कड़छम- वांगतू प्रोजेक्ट का मामला। शानन प्रोजेक्ट व बीबीएमबी में हिस्से की बकाया रकम लेने के लिए सरकार प्रयासरत है। उन्होंने विपक्षी भाजपा की भी प्रदेश हित की इस लड़ाई में राज्य सरकार के साथ आने की अपील की।

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