Himachal Assembly : नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे को लेकर विधानसभा में हंगामा, सीएम सुक्खू ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
सुक्खू ने भाजपा पर लगाया नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप
Himachal Pardesh : नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे का मुद्दा वीरवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शून्य काल के दौरान जोरशोर से गूंजा। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों के फैलते जाल जैसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण करने और उन्हें सनसनीखेज बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों का खतरा केवल पिछले तीन वर्षों, यानी हमारे सत्ता में आने के बाद ही नहीं फैला है। उन्होंने कहा कि भाजपा अब केवल पब्लिसिटी पाने के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य की उन पंचायतों की मैपिंग की है जहां नशीले पदार्थों की समस्या ज़्यादा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी मां नशीले पदार्थों के कारण अपने बच्चे को न खोए। उन्होंने कहा कि चिट्टे की तस्करी में शामिल कुल 11 पुलिसकर्मियों और आठ सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, इसके अलावा 60 अन्य लोगों को जेल भेज दिया गया है। यह पुलिस ही है जिसने कुल्लू एंटी-ड्रग टास्क फोर्स के उन चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया, जो ड्रग माफिया के साथ मिले हुए थे।
इस बीच जब मुख्यमंत्री बोल रहे थे, तो भाजपा विधायक नारे लगाते हुए सदन से बाहर चले गए। विपक्ष के हंगामे के बीच सुक्खू ने कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ इस लड़ाई में मैं विपक्ष सहित सभी से सहयोग चाहता हूँ। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बिना किसी कारण के अपना आपा खो देते हैं। शायद भाजपा के अंदर चल रही गुटबाजी के कारण ही नेता प्रतिपक्ष इतने चिड़चिड़े और अधीर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ वाकाथॉन का उद्देश्य जागरूकता पैदा करना है और राज्य में नशीले पदार्थों के खतरे को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
इससे पहले चिट्टा तस्करी में शामिल कुल्लू पुलिस के चार जवानों की गिरफ्तारी का मामला उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि अपने राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग करने के बजाय राज्य सरकार को ड्रग माफिया के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्रग माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाय, पुलिसकर्मियों को राजनेताओं की गतिविधियों पर नज़र रखने और यह देखने में व्यस्त रखा जा रहा है कि वे फोन पर किससे बात कर रहे हैं।
उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि पुलिस जैसा एक अनुशासित बल, जिसकी ज़िम्मेदारी अपराध और नशीले पदार्थों के खतरे को रोकना है, वही ड्रग माफिया के साथ मिला हुआ पाया गया है। उन्होंने कहा कि कुल्लू में एंटी-ड्रग स्पेशल टास्क फोर्स में तैनात चार पुलिसकर्मियों ने कुल्लू में तीन करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ जब्त किए थे, लेकिन आरोपियों को बिना किसी सजा के जाने दिया। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक मकसद पूरे करने के लिए पुलिस बल का गलत इस्तेमाल करने के बजाय सरकार सिंथेटिक नशीले पदार्थों के फैलाव को रोकने के लिए गंभीर प्रयास करे। ये प्रयास सिर्फ़ पड़ोसी राज्यों से सटे इलाकों तक सीमित नहीं होने चाहिए बल्कि हिमाचल के सबसे दूरदराज के इलाकों में भी उतने गम्भीर प्रयास होने चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए नशीले पदार्थों के खिलाफ 'वॉकाथॉन' जैसे बड़े कार्यक्रम सिर्फ दिखावे के लिए आयोजित कर दे हैं। ऊना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने मांग की कि ऐसे संवेदनशील कार्यों के लिए तैनात पुलिसकर्मियों की ईमानदारी की जांच ज़रूर की जानी चाहिए, ताकि ऐसी जिम्मेदारियां ईमानदार और नेक पुलिसकर्मियों को दी जाएं, न कि उन लोगों को जो पुलिस की वर्दी में ड्रग माफिया को संरक्षण देते हैं।

