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राष्ट्रगान पर हिमाचल विधानसभा में दूसरे दिन भी हाईवोल्टेज ड्रामा, दो बार स्थगित हुई विधानसभा

मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों पर फिर लगाया राष्ट्र गान के अपमान का आरोप

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शनिवार को भी लगातार दूसरे दिन राष्ट्र गीत के मुद्दे पर हाईवोल्टेज ड्रामा जारी रहा। सदन में आज इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार तकरार हुई और इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से जबरदस्त नारेबाजी भी की गई। भारी हंगामे और शोरगुल के चलते विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने पहले सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित की। दोपहर के भोजनावकाश के बाद जब फिर से सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो सत्ता पक्ष और विपक्ष एक बार फिर इसी मुद्दे पर आमने-सामने आ गए और मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण के बीच दोनों पक्षों ने सदन में भारी हंगामा किया, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 24 अगस्त, दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।इससे पहले, सदन में एक ओर जहां सत्तापक्ष खासकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा विधायकों पर बीते रोज राष्ट्र गान का अपमान करने का आरोप लगाया, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष से राष्ट्र गान का वीडियो सदन के बीच दिखाए जाने की मांग की ताकि पता चल सके कि वास्तव में राष्ट्र गान का किसी भाजपा विधायक ने अपमान किया है या मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर गाष्ट्र गान के अपमान को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया और इस झूठ के लिए माफी मांगने की मांग की।

प्रश्नकाल के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राष्ट्र गान के अपमान को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों का मामला उठाया। प्वाइंट आफ आर्डर के माध्यम से उठाए गए मामले में जयराम ठाकुर ने कहा कि किसी भी भाजपा विधायक ने राष्ट्र गान का अपमान नहीं किया है और मुख्यमंत्री पूरी तरह झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते रोज सदन में गाए गए राष्ट्र गान का वीडियो सदन में दिखाया जाए और यदि राष्ट्र गान का अपमान नहीं हुआ है तो मुख्यमंत्री झूठ बोलने के लिए तुरंत माफी मांगे। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा मुद्दा है।

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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि असल में राष्ट्र गान का अपमान कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडा फहराए जाने के दौरान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में राष्ट्र गीत वंदे मातरम् को खंडित किया गया था। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश संविधान से चलेगा, न कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के फरमान से।

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों पर कहा कि राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत कांग्रेस की देन है।उन्होंने कहा कि राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत किसी धर्म या किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश का है। इसके लिए कांग्रेस के लाखों लोगों ने कुर्बानी दी है। उन्होंने कहा कि दश को जिसने बनाया और कुर्बानी दी है, वह कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि भाजपा वाले सभी लोग ड्रामेबाज हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते रोज भाजपा विधायकों ने राष्ट्र गान खत्म होने से पहले ही हाथ खड़ा कर दिया था और वह राष्ट्र गान का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष आपदा के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सराज में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की तिरंगा लगी गाड़ी पर जूते और कपड़े फैंके थे और यह राष्ट्र ध्वज का बहुत बड़ा अपमान था।

इस बीच, भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि देश अथवा देशभक्ति की जहां भी बात हुई, वहां कांग्रेस हमेशा आगे रही है। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि मॉनसून सत्र के पहले दिन विपक्ष के सदस्यों ने राष्ट्र गान आरंभ होने से पहले ही राष्ट्र गीत के मुद्दे पर हाथ खड़े कर दिए थे, जो राष्ट्र गान का अपमान है। उन्होंने कहा कि झूठ बोलना भाजपा का तकिया कलाम हो गया है और भाजपाई सबसे अधिक झूठे हैं। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद सदन में भारी शोरगुल आरंभ हो गया और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और विधायक बिक्रम ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष से राष्ट्र गान का वीडियो सदन में दिखाए जाने की मांग की, जिसका मुख्यमंत्री ने यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने विरोध किया कि विपक्षी सदस्य इस वीडियो लाइब्रेरी में देख सकते हैं। इस दौरान सत्ता पक्ष के तमाम सदस्य अपनी सीटों पर खड़े हो गए और नारेबाजी करने लगे। इसके जवाब में पूरा विपक्ष भी अपनी सीटों पर नारेबाजी करने लगा। इससे कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदस्यों से सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन जब माहौल शांत नहीं हुआ तो उन्होंने सदन की कार्यवाही सोमवार, 24 अगस्त दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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