नारी पुरुषों पर भारी, मगर चुनाव में लाचारी : The Dainik Tribune

नारी पुरुषों पर भारी, मगर चुनाव में लाचारी

हिमाचल में महिला वोटरों की संख्या ज्यादा मगर विधानसभा पहुंची सिर्फ एक

नारी पुरुषों पर भारी, मगर चुनाव में लाचारी

प्रतीकात्मक चित्र

अंबिका शर्मा/ट्रिन्यू

सोलन, 8 दिसंबर

हिमाचल प्रदेश के सियासी गणित में महिलाओं की स्थिति अजीबोगरीब है। प्रदेश की कुल 68 में से 42 सीटों पर महिला वोटरों की संख्या अधिक है, लेकिन यह अजीब विडंबना है कि एकमात्र महिला इस बार विधानसभा तक पहुंच पाई हैं। यह कोई इस बार का मामला नहीं है, पहले भी इस पहाड़ी राज्य में ऐसा होता आया है। इस बार भी विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवार कोई छाप नहीं छोड़ पाईं। एकमात्र मौजूदा विधायक रीना कश्यप ने पच्छाद सीट से भाजपा को जीत दिलाई है।

इस बार हिमाचल में 34 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं। आम आदमी पार्टी (आप) जैसे कुछ दलों से चुनाव लड़ने वाली महिलाएं तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाईं। यहां उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश की यह स्थिति महिलाओं को जीत दिलाने में विफल रही।

एकमात्र कैबिनेट मंत्री सरवीन चौधरी तक इस बार चुनाव हार गयीं। वह पहले चार बार जीत चुकी थीं। इस बार वह कांगड़ा जिले की शाहपुर सीट को बरकरार रखने में विफल रहीं। वह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय संभाल रही थीं। कांग्रेस ने तीन महिला उम्मीदवारों को अबकी मैदान में उतारा था। उनमें से कोई भी जीतने में कामयाब नहीं रहीं। पूर्व कैबिनेट मंत्री और छह बार की कांग्रेस विधायक आशा कुमारी डलहौजी से हार गईं, जबकि कांग्रेस के पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर भी मंडी सदर से हार गईं। भाजपा ने पूर्व विधायकों की पत्नियों सहित 5 महिलाओं को मैदान में उतारा था- चंबा जिले के भटियात से नीलम नय्यर और हमीरपुर जिले के बड़सर से माया शर्मा को। शशि बाला को दूसरी बार रोहड़ू से उतारा गया है। दो मौजूदा विधायक-सिरमौर जिले के पच्छाद से रीना कश्यप और कांगड़ा जिले की इंदौरा सीट से रीता धीमान को भी मैदान में उतारा गया था। पच्छाद सीट से सिर्फ रीना कश्यप ही जीत पाई हैं। प्रदेश में वर्ष 1967 के बाद से केवल 41 महिलाएं ही राज्य विधानसभा तक पहुंच पाई।

शक्ति का सत्ता के द्वार से दूरी का सिलसिला जारी

हिमाचल में कुछ ही महिलाओं ने चुनावी राजनीति में सफलता का स्वाद चखा है। वर्ष 1998 में 25 महिला उम्मीदवारों ने विधानसभा चुनाव लड़ा था। इनमें से छह जीती थीं। दो भाजपा और चार कांग्रेस की। वर्ष 2003 में 31 महिलाएं मैदान में थीं, जिनमें कांग्रेस की 4 ने चुनाव जीता। इसी तरह 2007 में 25 महिलाओं ने चुनाव लड़ा और पांच को विधानसभा जाने का मौका मिला। वर्ष 2012 में सबसे ज्यादा 34 महिलाओं ने चुनाव लड़ा। तब भाजपा से 1 और कांग्रेस से 2 विधानसभा पहुंचीं। वर्ष 2017 में 19 महिलाएं मैदान में थीं और चार को ही सफलता मिली। एक अन्य ने उपचुनाव जीता था। इनमें थीं डलहौजी से कांग्रेस की आशा कुमारी, भाजपा की तीन उम्मीदवार-इंदौरा से रीता देवी, शाहपुर से सरवीन चौधरी, भोरंज से कमलेश कुमारी। पच्छाद से रीना कश्यप उप चुनाव जीती थीं।

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