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हिमाचल के राजस्व संसाधनों को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाये सरकार : शेखावत

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हिमाचल की बिगड़ती वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि राज्य का बढ़ता कर्ज और राजकोषीय घाटा भविष्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने...

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केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हिमाचल की बिगड़ती वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि राज्य का बढ़ता कर्ज और राजकोषीय घाटा भविष्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्तीय घाटा केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि ठोस और संरचनात्मक सुधारों से ही कम किया जा सकता है। शेखावत ने रविवार को शिमला में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल जीडीपी अनुपात में सबसे अधिक कर्ज लेने वाले आधा दर्जन राज्यों में शुमार है।मौजूदा समय में राज्य का कर्ज जीडीपी अनुपात के लगभग 42 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो चिंता का संकेत है। उन्होंने कहा कि राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का करीब 76 प्रतिशत हिस्सा केवल कर्ज पर ब्याज, कर्ज की किश्तें, सरकारी कर्मचारियों के वेतन और मेडिकल बिलों के भुगतान में ही खर्च हो जाता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बेशक राजकोषीय घाटे के कई कारण हो सकते हैं, मगर इसका सीधा तात्पर्य आय और व्यय के बीच बढ़ता अंतर है। इस अंतर को कम करना ही वास्तविक वित्तीय अनुशासन है। उन्होंने राज्य सरकार से दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन अपनाने और अपने राजस्व संसाधनों को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।

आरडीजी का उल्लेख करते हुए शेखावत ने कहा कि इसकी शुरुआत वित्त आयोग ने अस्थायी राहत के रूप में की थी, ताकि वित्तीय अनुशासन न अपनाने वाले राज्य अपनी आय बढ़ा सकें। बाद के वित्त आयोगों ने इसे चेतावनी के साथ जारी रखा लेकिन इसका उद्देश्य राज्यों को स्थायी निर्भरता में डालना नहीं था। अब वित्त आयोग का स्पष्ट मत है कि राज्यों को निरंतर अनुदानों की बजाय अपने संसाधन स्वयं बढ़ाने होंगे।

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