ऊना में हर नौवां हेक्टेयर, कांगड़ा में 9.23 फीसदी मक्का प्रभावित; हिमाचल की मक्का फसल पर फॉल आर्मीवर्म का हमला
9 हजार हेक्टेयर चपेट में, 2.54 लाख हेक्टेयर में मक्का की खेती, 10 जिलों में दर्ज हुआ कीट का प्रकोप; सोलन से निगरानी और खेतों में सर्वे, 115 किसान फील्ड स्कूलों में दी गई ट्रेनिंग
Himachal Farmers : हिमाचल प्रदेश की मक्का फसल पर फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप 10 जिलों तक पहुंच गया है। 25 जुलाई तक के कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में मक्का के कुल 2 लाख 54 हजार 104 हेक्टेयर क्षेत्र में से 19 हजार 28 हेक्टेयर यानी 7.48 फीसदी फसल प्रभावित पाई गई है। सबसे ज्यादा असर ऊना में है, जहां 4 हजार 561 हेक्टेयर यानी मक्का क्षेत्र का 11 फीसदी हिस्सा प्रभावित है।
वहीं दूसरी ओर, कांगड़ा में 4 हजार 175 हेक्टेयर और 9.23 फीसदी क्षेत्र इसकी चपेट में है। भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर के लोकसभा में उठाए गए सवाल पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने यह जानकारी दी। मंडी में 3 हजार 135 हेक्टेयर, सोलन में 1 हजार 980 और हमीरपुर में 1 हजार 970 हेक्टेयर मक्का प्रभावित बताया गया है। केंद्र ने 2026-27 में मक्का एवं जौ में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट के लिए हिमाचल को 12.375 लाख रुपये मंजूर किए हैं। किसानों को फेरोमोन ट्रैप, नीम आधारित कीटनाशक और जैविक नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
यह है जिलावार संक्रमण की तस्वीर
क्षेत्रफल के अनुपात में सोलन और सिरमौर में 9-9 फीसदी, मंडी में 7.12, हमीरपुर में 7.02, बिलासपुर में 4.63, चंबा में 3.16, शिमला में 0.52 और कुल्लू में 0.46 फीसदी मक्का प्रभावित है। यानी प्रकोप का सबसे ज्यादा दबाव ऊना-कांगड़ा समेत निचले और मध्य पहाड़ी जिलों में है।
सोलन से निगरानी, खेतों में संयुक्त सर्वे
सोलन स्थित सेंट्रल इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर लगातार सर्विलांस, रैपिड रोविंग सर्वे और पेस्ट मॉनिटरिंग कर रहा है। केंद्र और हिमाचल कृषि विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित खेतों में सर्वे कर रही हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान ने भी कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ पूरे सीजन निगरानी की है।
115 किसान फील्ड स्कूल, लगातार एडवाइजरी
किसानों को कीट की पहचान और नियंत्रण के तरीके बताने के लिए सोलन केंद्र ने 2024-25 में 105 और 2025-26 में 115 किसान फील्ड स्कूल आयोजित किए। कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन, ऊना और सिरमौर के प्रभावित ब्लॉकों के लिए जुलाई में एडवाइजरी भी जारी की गई।
नुकसान पर बीमा, निगरानी में एआई
केंद्र ने अलग मुआवजा पैकेज के बजाय प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्र नुकसान पर बीमित किसानों को क्लेम का प्रावधान बताया है। वहीं, नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम में एआई और मशीन लर्निंग के जरिए कीट हमले की रियल टाइम निगरानी, शुरुआती चेतावनी और किसानों को तत्काल फसल सुरक्षा सलाह देने की व्यवस्था की जा रही है।

