CM सुक्खू के 'कौवों की तरह कायं-कायं' वाले बयान पर अनुराग ठाकुर का पलटवार, बोले - कुछ लोगों का काम केवल जुबान चलाना
केंद्र के कार्यों का उद्घाटन कर रही प्रदेश सरकार, कांग्रेस चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के बजाए आत्ममंथन करे
Himachal Pardesh News : भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद अनुराग ठाकुर ने शनिवार को जिला मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बल्ह दौरे के दौरान हिमाचल के सांसदों को लेकर दिए गए ‘कौवों की तरह कायं-कायं’ वाले बयान पर पलटवार किया। अनुराग ने कहा कि कुछ लोगों का काम केवल जुबान चलाना रह गया है, जबकि वे काम करने में विश्वास रखते हैं।
मुख्यमंत्री 26 सितंबर को बल्ह विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास के लिए पहुंचे थे। अनुराग ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार अपने स्तर पर विकास कार्य करने के बजाय केंद्र सरकार की ओर से करवाए गए कार्यों का उद्घाटन करने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों की हालत खराब है और सरकार के पास पैचवर्क तक के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर जनता पर सेस और टैक्स का बोझ डालने का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग से जुड़े बयानों पर सांसद ने कहा कि कांग्रेस चुनाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है। हिमाचल कांग्रेस ने हाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अनुराग ने कहा कि एक रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करना उचित नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस के पुराने चुनावी दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी चुनावों में अनियमितताओं और बूथ कब्जे जैसे आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद व्यवस्था पर सवाल खड़े करना कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विकल्प नहीं हो सकता। मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के संदर्भ में चल रहे राजनीतिक विवाद पर अनुराग ने कहा कि विपक्ष को अपनी चुनावी परिस्थितियों पर आत्मचिंतन करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कभी ईवीएम, कभी एसआईआर, कभी चुनाव आयोग और कभी चुनाव आयुक्त को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। उनके अनुसार, जनता के जनादेश का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है और राजनीतिक दलों को अपनी हार के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए। सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच अपने काम और नीतियों के आधार पर विश्वास कायम करने पर ध्यान देना चाहिए।

