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आरडीजी खत्म होने के बाद अब खर्चे कम करने में जुटी सुक्खू सरकार

कंगाली में कटौती शुरू : अफसरों को टेलीफोन लगे होने का सबूते देने पर ही मिलेगा बिल का पैसा

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू।
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हिमाचल प्रदेश में आरडीजी बंद होने के बाद सूक्खु सरकार ने खर्चों में कटौती शुरू कर दी है ताकि कंगाली में कुछ राहत मिल सके। सरकार के खर्चे कम करने के उपायों की सबसे पहली मार अफसर के फोन पर पड़ी है। प्रदेश में अब लैंड लाइन व मोबाइल का द्विमासिक भुगतान लेने के लिए अधिकारियों को घर पर फोन लगा होने के दस्तावेजी सबूत देने होंगे। विभागाध्यक्ष के माध्यम से इन सबूतों को आहरण एवं वितरण अधिकारी, डीडीओ को देना होगा। दस्तावेजी सबूत न दिए जाने की स्थिति में भुगतान पाने के पात्र अधिकारी को टेलीफोन के बिल का पैसा नहीं मिलेगा।

प्रदेश में मुख्यमंत्री व मंत्रियों के अलावा मुख्य सचिव, डीजीपी , मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव समेत अधिकारियों की कुछ श्रेणियां ऐसी हैं जिन्हें लैंड लाइन अथवा मोबाइल फोन के पूरे बिल की प्रतिपूर्ती सरकार करती है। अर्थात बिल की तमाम राशि का भुगतान सरकारी इन श्रेणियों को वापस करती है। इसके अलावा सचिव व विभागाध्यक्षों को दो माह में लैंड लाइन के 2500 व मोबाइल के 900 रुपए का भुगतान खजाने से किया जाता है। मंडलायुक्त, डीआईजी, एडीएम, उपायुक्त व एसपी सहित कुछ श्रेणियों को लैंड लाइन का 2100 व मोबाइल का 800 रुपए का भुगतान दो माह में होता है। एडीएम, प्रबंध निदेशक, मुख्य अभियंता से ऊपर के रैंक के अधिकारियों को लैंड लाइन का 2 हजार व मोबाइल का 700 रुपए का भुगतान हर दो माह में किया जाता है। विशेष सचिव व कुछ श्रेणियों को द्विमासिक आधार पर लैंड लाइन का 1300 व मोबाइल के 500 रुपए के बिल की प्रतिपूर्ति होती है।

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अभी तक सरकार सभी पात्र श्रेणियों को द्विमासिक आधार पर लैंड लाइन व मोबाइल बिल की प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान खजाने से करती रही है। मगर अब लैंड लाइन व इंटरनेट सेवा के घर में लगे होने के दस्तावनेजी सबूत देने पर ही खजाने से भुगतान होगा।

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