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Women Police : दूसरों का तनाव संभालती पुलिस, अब अपने तनाव का भी हिसाब लेगी; महिला पुलिसकर्मियों को सिखाए गए मानसिक दबाव पहचानने के तरीके

संकट में मदद लेने पर जोर... आत्महत्या की रोकथाम से लेकर कार्यस्थल के तनाव तक पर विशेषज्ञों ने की बात, 112 के साथ जिला मानसिक स्वास्थ्य टीम से मदद लेने की भी दी जानकारी

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Women Police : थाने में शिकायत लेकर पहुंचा परेशान व्यक्ति हो, घरेलू विवाद में उलझा परिवार या किसी संकट में फंसा नागरिक, सबसे पहले उसका सामना अक्सर पुलिस से ही होता है। रोज दूसरों का तनाव और संकट संभालने वाली पुलिस अब अपने कर्मचारियों के मानसिक दबाव को लेकर भी गंभीर हो रही है। इसी कड़ी में हरियाणा राज्य प्रवर्तन ब्यूरो ने डायल-112 परिसर में महिला पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने महिला पुलिसकर्मियों को बताया कि मानसिक दबाव अचानक बड़ी समस्या नहीं बनता। उसके संकेत पहले दिखाई देने लगते हैं। इन संकेतों को पहचानकर समय पर मदद लेना जरूरी है। राज्य के विभिन्न थानों में कार्यरत 25 से अधिक महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने इसमें हिस्सा लिया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रविकिरण माटा की प्रेरणा और पुलिस अधीक्षक ताहिर हुसैन के मार्गदर्शन में हुए कार्यक्रम में डॉ. लीजू भुसरी की टीम ने विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया। निरीक्षक सोमवती, रीडर अवतार और अधीक्षक विक्रम ने विशेषज्ञों को पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

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तनाव छिपाना नहीं, पहचानना सीखें

पंचकूला सिविल अस्पताल की न्यूरो-साइकियाट्रिस्ट डॉ. लीजू भुसरी ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती पहचान पर चर्चा की। उन्होंने लगातार तनाव, व्यवहार में बदलाव और मानसिक दबाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सहायता लेने पर जोर दिया। कार्यक्रम में आत्महत्या और संकट की रोकथाम को लेकर भी विशेष रूप से बात हुई। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि किसी आपात स्थिति में 112 पर तत्काल संपर्क किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर नजदीकी जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम से परामर्श और सहायता भी ली जा सकती है।

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ड्यूटी खत्म होने के बाद भी तनाव साथ न रहे

डॉ. जसलीन ने कार्यस्थल के तनाव को लेकर पुलिसकर्मियों से संवाद किया। उन्होंने तनाव के असर को पहचानने, उससे निपटने और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के उपाय बताए। उनका जोर इस बात पर रहा कि ड्यूटी का दबाव सामान्य मानकर उसे लगातार अपने भीतर दबाते रहना समाधान नहीं है। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए सकारात्मक अभिपुष्टियों यानी पॉजिटिव अफर्मेशंस के इस्तेमाल के तरीके भी बताए गए।

पुलिस का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी जरूरी

कार्यक्रम के संयोजक कल्याण निरीक्षक राजीव रंजन ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली ही ऐसी है जिसमें कर्मचारियों का सामना लगातार दुख, तनाव और संकट से जूझ रहे लोगों से होता है। ऐसे में दूसरों को संभालने वाले पुलिसकर्मियों का खुद मानसिक रूप से स्वस्थ रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य की बात करते समय शारीरिक फिटनेस पर तो ध्यान दिया जाता है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही गंभीरता से लेना होगा।

महिला पुलिसकर्मियों के लिए क्यों जरूरी

पुलिस थानों और फील्ड ड्यूटी में महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका लगातार बढ़ी है। उन्हें कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के साथ महिला और बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों को भी संभालना पड़ता है। ऐसे मामलों में लगातार भावनात्मक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। कार्यक्रम में इसी वजह से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने पर जोर दिया गया।

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