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राज्यसभा से पहले ‘वोटिंग का वॉर रूम’, विधायकों की वोटिंग पाठशाला!

हिमाचल की वादियों से चंडीगढ़ के फाइव स्टार होटल तक, विधायकों ने की रिहर्सल

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राज्यसभा चुनाव से पहले चंडीगढ़ में एकजुट भाजपा विधायक।
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हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासत ने नया रंग ले लिया है। इस बार मुकाबला सिर्फ वोटों का नहीं बल्कि ‘वोटिंग की तकनीक’ का भी बन गया है। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने अपने-अपने विधायकों के लिए बाकायदा ‘ट्रेनिंग कैंप’ और मॉक ड्रिल शुरू कर दी है, ताकि मतदान के दिन कोई तकनीकी गलती न हो और एक भी वोट अमान्य न जाए।

एक तरफ कांग्रेस अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के कूफरी और चैल की वादियों में ले जाकर मतदान की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास करा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा ने चंडीगढ़ के फाइव स्टार होटल जेडब्ल्यू मेरिएट में अपने विधायकों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया है। राजनीतिक गलियारों में इसे राज्यसभा चुनाव से पहले ‘वोटिंग का वॉर रूम’ कहा जा रहा है, जहां हर कदम पूरी रणनीति के साथ उठाया जा रहा है।

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कांग्रेस की ‘वोटिंग पाठशाला’ वादियों में

कुफरी में मौसम का आनंद लेते कांग्रेस विधायक और नेता। -ट्रिब्यून फोटो
कुफरी में मौसम का आनंद लेते कांग्रेस विधायक और नेता। -ट्रिब्यून फोटो

कांग्रेस के 31 विधायक चंडीगढ़ से हिमाचल प्रदेश के कूफरी पहुंचे, जहां पार्टी ने राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। कुफरी में आयोजित मॉक ड्रिल में कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने पर्यवेक्षक की भूमिका निभाई। दिलचस्प बात यह है कि 16 मार्च को होने वाले वास्तविक चुनाव में भी वे नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ यही जिम्मेदारी निभाने वाले हैं। मॉक ड्रिल के दौरान मतदान की पूरी प्रक्रिया उसी तरह दोहराई गई जैसे असली चुनाव में होती है।

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माइक पर दीपेंद्र की कमान

प्रशिक्षण सत्र के दौरान पूरे कार्यक्रम की कमान रोहतक सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के हाथ में रही। उन्होंने एक-एक करके विधायकों को माइक पर बुलाया और उन्हें मतदान की प्रक्रिया समझाई। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र और आदमपुर विधायक चंद्रप्रकाश ने विधायकों को बताया कि वोट डालते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इसके बाद उन्होंने विधायकों को वोटिंग स्लिप भी दी। स्लिप पर निशान लगाने के लिए पेन सह-प्रभारी भूपेश बघेल ने उपलब्ध कराया। जब विधायक ने वोटिंग स्लिप पर निशान लगाया तो बीके हरिप्रसाद ने पर्यवेक्षक के रूप में उस वोट को देखा और फिर मतपेटी में डलवाया गया। इस तरह पूरी प्रक्रिया बिल्कुल वास्तविक मतदान की तरह दोहराई गई। कुफरी में प्रशिक्षण के बाद कांग्रेस विधायक चैल पहुंचे, जहां लंच के बाद वे फिर रिजॉर्ट लौट गए।

भाजपा की चंडीगढ़ में कड़ी घेराबंदी

उधर भाजपा ने भी कांग्रेस की रणनीति का जवाब अपनी शैली में दिया। पार्टी ने अपने सभी विधायकों को चंडीगढ़ बुलाकर उन्हें एक होटल में ठहराया और मतदान प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया। शनिवार सुबह भाजपा विधायक पहले हरियाणा निवास में एकत्र हुए, जहां से उन्हें चंडीगढ़ के फाइव स्टार होटल जेडब्ल्यू मेरिएट ले जाया गया। यहां आयोजित प्रशिक्षण सत्र में मॉक ड्रिल के जरिए मतदान की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई। विधायकों को बताया गया कि राज्यसभा चुनाव में प्रथम वरीयता और द्वितीय वरीयता का वोट कैसे डाला जाता है और किन गलतियों से वोट अमान्य हो सकता है। भाजपा ने अपने विधायकों को 14 से 16 मार्च की सुबह तक चंडीगढ़ में ही रुकने के निर्देश दिए हैं ताकि मतदान से पहले रणनीति और अनुशासन बनाए रखा जा सके।

चुनाव के लिए एजेंटों की भी नियुक्ति

राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपने एजेंटों और प्रतिनिधियों की भी नियुक्ति कर दी है। कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी को पार्टी का चुनाव एजेंट बनाया गया है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा और विधायक योगेंद्र राणा को काउंटिंग एजेंट की जिम्मेदारी दी गई है। खेल मंत्री गौरव गौतम और दादरी विधायक सुनील सतपाल सांगवान को पार्टी प्रतिनिधि और पार्टी एजेंट के रूप में तैनात किया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन नियुक्तियों का मकसद मतदान और मतगणना के दौरान पूरी सतर्कता बनाए रखना है।

40 नए विधायकों पर खास नजर

इस बार विधानसभा की तस्वीर भी चुनाव को रोचक बना रही है। 90 सदस्यीय सदन में करीब 40 विधायक ऐसे हैं जो पहली बार चुनकर आए हैं। इनमें कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय तीनों ही खेमों के विधायक शामिल हैं। पहली बार चुने गए विधायकों को देखते हुए सभी दल अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। पिछले राज्यसभा चुनाव में हुई सियासी खींचतान और वोटिंग से जुड़े विवादों को ध्यान में रखते हुए इस बार किसी भी तरह की तकनीकी चूक से बचने की पूरी कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि दोनों दलों ने अपने विधायकों के लिए मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं।

निर्णायक मोड़ पर सियासी मुकाबला

राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने विधायकों को एकजुट रखने और रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। एक तरफ कांग्रेस ने अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश ले जाकर राजनीतिक और तकनीकी दोनों तरह की तैयारी की है, वहीं भाजपा ने उन्हें चंडीगढ़ में ही एक साथ रखकर अनुशासन और रणनीति पर जोर दिया है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि राज्यसभा चुनाव की इस ‘वोटिंग पाठशाला’ में किसकी तैयारी ज्यादा मजबूत साबित होगी। सभी की नजर अब 16 मार्च को होने वाली वोटिंग और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी है। चूंकि इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक ताकत का नहीं, बल्कि रणनीति, अनुशासन और वोटिंग की बारीक समझ का भी है।

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