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डोंकी रूट पर तीसरी बार वार : हरियाणा में बनेगा सख्त ट्रैवल एजेंट कानून

विदेश में नेटवर्क पर रोक, बिना पंजीकरण काम किया तो जेल

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मुख्यमंत्री नायब सैनी। फाइल फोटो
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अवैध रास्तों से युवाओं को विदेश भेजने वाले ट्रैवल एजेंटों पर शिकंजा कसने के लिए हरियाणा सरकार तीसरी बार कानून में संशोधन करने जा रही है। सरकार अब ऐसा प्रावधान जोड़ने की तैयारी में है, जिससे ट्रैवल एजेंट न केवल राज्य में बल्कि विदेशों में भी अपना अनौपचारिक नेटवर्क खड़ा न कर सकें। बिना पंजीकरण काम करने वाले एजेंटों के लिए सख्त दंड और जेल का प्रावधान प्रस्तावित है।

हरियाणा विधानसभा पहले ही 2024 और 2025 में ‘हरियाणा ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण और विनियमन’ कानून को संशोधनों सहित पारित कर चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार के सुझावों के चलते दोनों बार मसौदा वापस लौट आया। अब 2026 में इसे और मजबूत तथा केंद्रीय कानूनों के अनुरूप बनाकर फिर से सदन में पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं यह संशोधन विधेयक सदन में पेश करेंगे, ताकि सरकार का सख्त संदेश साफ तौर पर सामने आए।

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टकराव की जड़: उत्प्रवास कानून

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केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि राज्य के प्रस्तावित कानून के कुछ प्रावधान ‘उत्प्रवासन अधिनियम-1983’ से मेल नहीं खाते। इस केंद्रीय कानून के तहत विदेश रोजगार के लिए जाने वाले भारतीय नागरिकों को ‘प्रोटेक्टर जनरल ऑफ एमिग्रेंट्स’ (पीजीई) के साथ पंजीकरण और अनुमति प्रक्रिया से गुजरना होता है। केंद्र की आशंका है कि अगर राज्य कानून में समन्वय स्पष्ट नहीं हुआ तो कुछ एजेंट इन प्रावधानों का दुरुपयोग कर केंद्रीय नियमों को दरकिनार करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी कारण राज्य सरकार को मसौदे में सामंजस्य बैठाने की सलाह दी गई है।

17 देशों का जोखिम और ‘डोंकी’ नेटवर्क

सरकारी सूत्रों का मानना है कि ऐसे कई देश हैं, जहां प्रवास और रोजगार से जुड़े नियम अपेक्षाकृत ढीले हैं या शिकायत निवारण तंत्र मजबूत नहीं है। इन परिस्थितियों का फायदा उठाकर कुछ एजेंट युवाओं को ‘डोंकी रूट’ से भेजते हैं, जिसमें अवैध ट्रांजिट, फर्जी वीजा और भारी वसूली शामिल होती है। नए संशोधन में प्रस्ताव है कि किसी भी एजेंट को विदेश में संपर्क सूत्र, सब-एजेंट या सहयोगी नेटवर्क स्थापित करने से पहले विस्तृत घोषणा और अनुमति लेनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द करने के साथ आपराधिक कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।

पंजीकरण अनिवार्य, निगरानी डिजिटल

सरकार पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह अनिवार्य और डिजिटल ट्रैकिंग आधारित बनाने पर विचार कर रही है। हर अधिकृत एजेंट का डेटाबेस तैयार होगा, जिसमें उनके कार्यालय, कर्मचारियों, विदेशी साझेदारों और लेन-देन का रिकॉर्ड रहेगा। पीड़ितों की शिकायतों के लिए एक समर्पित तंत्र भी प्रस्तावित है, ताकि ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई हो सके।

मुख्यमंत्री का तर्क: मजबूत ढांचा जरूरी

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कहना है कि नया संशोधन इसलिए जरूरी है ताकि राज्य कानून और केंद्रीय उत्प्रवास कानून के बीच किसी भी प्रकार की विसंगति दूर हो सके। उनका तर्क है कि जब तक नियामक ढांचा मजबूत और समन्वित नहीं होगा, तब तक बेईमान एजेंट कानूनी खामियों का फायदा उठाते रहेंगे। केंद्र ने भी सुझाव दिया है कि सुरक्षित और वैध प्रवासन के लिए राज्य और केंद्र को समन्वित ढांचा विकसित करना चाहिए। हरियाणा सरकार का दावा है कि तीसरे संशोधन के बाद कानून इतना स्पष्ट और कठोर होगा कि अवैध नेटवर्क चलाने वालों के लिए राज्य में जगह नहीं बचेगी।

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