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न्यायपालिका की आजादी पर नहीं होगा कोई समझौता : सीजेआई सूर्यकांत

विश्व का सबसे बड़ा मूट कोर्ट न्यायाभ्यास मंडपम का किया लोकार्पण

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सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल विवि. में विश्व के सबसे मूट कोर्ट का रिबन काटकर लोकार्पण करते मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत। साथ हैं केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल और विवि. के चांसलर नवीन जिंदल।-हप्र
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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है और इस पर किसी भी तरह का दबाव या दखल स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शनिवार को ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय में ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता’ पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। साथ ही कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सांसद एवं विवि. के चांसलर नवीन जिंदल भी मंच पर मौजूद रहे।

कार्यक्रम में दुनिया के सबसे बड़े मूट कोर्ट न्यायाभ्यास मंडपम का लोकार्पण किया गया। इसे ईमानदार नाम दिया गया है, जिस पर छात्र वास्तविक अदालती माहौल में बहस और वकालत की ट्रेनिंग ले सकेंगे। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, जस्टिस, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस व पूर्व जज, अंतर्राष्ट्रीय विधि विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिवक्ता, शिक्षाविद, पत्रकार और वकील मौजूद रहे। इसके अलावा केशवानंद भारती केस का मंचन किया गया, जिसमें 13 जज एक साथ शामिल हुए।

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उद्घाटन के बाद ऐतिहासिक केशवानंद भारती केस का नाट्य-प्रस्तुतीकरण हुआ। इसमें देश के अटॉरनी जरनल आर. वेंकटरमणी, एसजी. तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और सिद्धार्थ लूथरा शामिल रहे।

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इसके बाद पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 13 जस्टिस ने एक साथ इस फैसले और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर अपने विचार रखे।

मुख्य न्यायाधीश ने दोहराया कि संविधान की मूल संरचना फ्रीडम, लोकतंत्र, सेकुलरिज्म, न्याय को न तो कमजोर किया जा सकता है और न बदला जा सकता है। ज्यूडिशियल रिव्यू न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत है और यह कायम रहेगी।

इस चर्चा में जस्टिस बीवी. नागरत्ना, एमएम सुंदरेश, पीएस नरसिम्हा सहित 13 जस्टिस शामिल रहे। कार्यक्रम का परिचय कार्यकारी डीन प्रो. दीपिका जैन ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. डबीरु श्रीधर पटनायक ने किया।

संविधान की चारपाई हैं लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद और न्यायपालिका: सूर्यकांत

उन्होंने कहा कि मूल संरचना सिद्धांत ने यह स्थापित किया कि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद और न्यायपालिका की स्वतंत्रता अटल हैं। उन्होंने भारतीय संविधान को चारपाई जैसा बताया। जिसकी मजबूती कठोरता और लचीलेपन के संतुलन में है। रस्सियां बहुत कसीं तो टूट जाएंगी, ढीली छोड़ दीं तो ढह जाएगी। ठीक इसी संतुलन ने भारत को एक युवा गणराज्य होते हुए भी अत्यंत परिपक्व लोकतंत्र बनाया।

स्वतंत्र ही नहीं, सक्षम भी होनी चाहिए न्यायपालिका: मेघवाल

कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की मूल शर्त है और संविधान ने इसे मज़बूती से सुरक्षित किया है। उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 50, 121 और 122 स्पष्ट करते हैं कि शक्तियों का पृथकरण और संस्थागत गरिमा किसी भी हस्तक्षेप से ऊपर है। मेघवाल ने कहा कि न्यायपालिका केवल स्वतंत्र ही नहीं, बल्कि सक्षम भी होनी चाहिए और इसी दिशा में सरकार ई-कोट्र्स, डिजिटल सिस्टम और न्यायिक ढांचे के आधुनिकीकरण पर तेजी से काम कर रही है।

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