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हरियाणा विधानसभा ने संयुक्त पंजाब विधानसभा के पूर्व सदस्य चौधरी सही राम बिश्नोई और पूर्व विधायक राजपाल भूखड़ी को किया याद

हरियाणा के 27 वीर जवानों की शहादत को नमन; रोहतक अग्निकांड और झज्जर के मुनिमपुर हादसे के मृतकों को भी श्रद्धांजलि

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फाइल फोटो डीपीआर
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Haryana Assembly : हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन हंगामे और राजनीतिक टकराव से पहले सदन कुछ देर के लिए गमगीन नजर आया। सत्र की शुरुआत शोक प्रस्तावों से हुई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल सहित सदन के सदस्यों ने पिछले विधानसभा सत्र के बाद दिवंगत हुए पूर्व विधायकों, शहीद जवानों, हादसों में जान गंवाने वाले नागरिकों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शोक प्रस्ताव पढ़ते हुए दिवंगत आत्माओं को नमन किया और शोक-संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सदन ने नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ में मारे गए लोगों के निधन पर भी शोक जताया। सदस्यों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए उनके परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति देने की कामना की।

संयुक्त पंजाब के पूर्व विधायक सही राम बिश्नोई को याद किया

सदन ने संयुक्त पंजाब विधानसभा के पूर्व सदस्य चौधरी सही राम बिश्नोई के निधन पर शोक व्यक्त किया। उनका निधन 22 मई को हुआ था। 12 जनवरी 1922 को जन्मे बिश्नोई वर्ष 1960 में संयुक्त पंजाब विधानसभा के सदस्य चुने गए थे। विधानसभा ने उन्हें निष्ठावान जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद किया। सदन ने कहा कि उनके निधन से प्रदेश ने एक योग्य जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता खो दिया।

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पूर्व विधायक राजपाल भूखड़ी के निधन पर भी शोक

हरियाणा विधानसभा के पूर्व सदस्य राजपाल भूखड़ी के निधन पर भी सदन ने गहरा शोक जताया। उनका निधन 20 जुलाई 2026 को हुआ। 19 मई 1971 को जन्मे भूखड़ी वर्ष 2009 में हरियाणा विधानसभा के सदस्य चुने गए थे। विधानसभा में उन्हें गरीब और कमजोर वर्गों के कल्याण तथा उत्थान के लिए समर्पित जनप्रतिनिधि के रूप में याद किया गया। सदन ने उनके निधन को प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

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27 शहीद जवानों को नमन

शोक प्रस्तावों का सबसे भावुक हिस्सा हरियाणा के उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि देना रहा, जिन्होंने मातृभूमि की एकता और अखंडता की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। सदन ने डिप्टी कमांडेंट मनोहर सिंह फौगाट, लेफ्टिनेंट निशांत, नायब सूबेदार वीरेन्द्र सिंह, उप निरीक्षक कृष्ण कुमार बुम्बक, सहायक उप निरीक्षक पवन कुमार, सहायक उप निरीक्षक विनोद कुमार, सहायक उप निरीक्षक जयप्रकाश, सहायक उप निरीक्षक दयाकिशन, हवलदार रामबीर, हवलदार कृष्ण कुमार, हवलदार सोनू, हवलदार रामनारायण, सार्जेंट सुरेन्द्र कादियान, प्रधान नाविक राजेश कुमार, नायक रवि प्रकाश, नायक आनंद कुमार, नायक मनोज कुमार, कॉरपोरल भरतराज भारद्वाज, सिपाही संदीप कुमार, सिपाही संदीप कुमार, सिपाही सतीश, सिपाही राजकुमार, सिपाही सोनू कुमार, सिपाही शमशेर सिंह, सिपाही कुलवंत सिंह, अग्निवीर ध्रुव और अग्निवीर शंकर की शहादत को नमन किया। इन वीरों का संबंध चरखी दादरी, झज्जर, महेंद्रगढ़, करनाल, भिवानी, रेवाड़ी, हांसी, पलवल और पानीपत समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से था।

डी-पार्क अग्निकांड के तीन मृतकों को श्रद्धांजलि

सदन ने 9 जून 2026 को रोहतक की डी पार्क मार्केट में हुए अग्निकांड में जान गंवाने वाले तीन लोगों को भी श्रद्धांजलि दी। जूतों की दुकानों में लगी आग ने तीन लोगों की जान ले ली थी। विधानसभा ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई।

मुनिमपुर कुआं हादसे में चार मौतों पर भी शोक

झज्जर जिले के मुनिमपुर गांव में 19 जुलाई को हुए दर्दनाक हादसे को भी शोक प्रस्ताव में शामिल किया गया। कुएं में गिरे बछड़े को बचाने के प्रयास में चार लोग कुएं के भीतर उतरे थे। जहरीली गैस के कारण दम घुटने से चारों की मौत हो गई। सदन ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

विधायक रघुबीर तेवतिया के भाई को भी श्रद्धांजलि

विधानसभा ने विधायक रघुबीर सिंह तेवतिया के भाई रामशरण तेवतिया के निधन पर भी शोक जताया। रामशरण तेवतिया का निधन 22 जून 2026 को हुआ था। सदन ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विधायक तेवतिया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

शोक से शुरू हुआ दिन, बाद में हंगामे में बदला सदन

मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा की शुरुआत जहां दिवंगत पूर्व जनप्रतिनिधियों, शहीदों और हादसों में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने से हुई, वहीं शोक प्रस्तावों के समाप्त होते ही सदन का माहौल पूरी तरह बदल गया। कुछ ही देर बाद विधानसभा के बाहर हुए कथित धक्का-मुक्की के घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने सरकार और विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था को घेर लिया। आरोप-प्रत्यारोप बढ़े, नारेबाजी हुई और देखते ही देखते विपक्ष वेल तक पहुंच गया। इस तरह जिस सदन ने दिन की शुरुआत शहीदों और दिवंगतों की स्मृति में मौन और संवेदना के साथ की थी, वही सदन कुछ ही देर बाद हंगामे, नारेबाजी और निलंबन का गवाह बन गया।

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