27 अगस्त से हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र, तीन दिन चलने के आसार; कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्यपाल को भेजा जाएगा पत्र
सवाल लगाने के लिए विधायकों को मिलेगा समय... कानून-व्यवस्था, कर्मचारियों की हड़ताल और जनहित के मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरेगा
Haryana Assembly Session : हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त से शुरू होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में वीरवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। हालांकि सत्र कितने दिन चलेगा, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा संकेतों के मुताबिक तीन दिन का छोटा सत्र होने की संभावना है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब सरकार सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल को पत्र भेजेगी।
राज्यपाल की स्वीकृति के बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से औपचारिक कार्यक्रम जारी किया जाएगा। सत्र शुरू होने में अभी करीब दो सप्ताह का समय है। ऐसे में विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े सवाल विधानसभा सचिवालय को भेज सकेंगे। इनमें सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों, विभागीय फैसलों और स्थानीय समस्याओं से जुड़े सवाल शामिल होंगे।
विधानसभा में पूछे जाने वाले तारांकित और अतारांकित सवालों का चयन स्पीकर हरविंद्र कल्याण की अध्यक्षता में होने वाले ड्रा के जरिये किया जाएगा। सत्र छोटा होने के कारण सवालों और अन्य विधायी कार्यों के चयन को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच खींचतान देखने को मिल सकती है। मानसून सत्र में विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गया है। कानून-व्यवस्था विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में रहने की संभावना है।
प्रदेश में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों की मांगों और अलग-अलग विभागों में हो रही हड़तालों का मुद्दा भी सदन में उठ सकता है। विपक्ष यह सवाल उठा सकता है कि कर्मचारियों की मांगों के समाधान के लिए सरकार की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
छोटे सत्र में ज्यादा मुद्दे, सरकार के सामने चुनौती
विधानसभा का सत्र यदि तीन दिन का ही रहता है तो विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए समय सीमित होगा, लेकिन मुद्दों की कमी नहीं है। रोजगार, कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, किसान, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब मांगे जाने की संभावना है। वहीं, सरकार की कोशिश रहेगी कि सत्र के दौरान अपने विधायी एजेंडे और विकास कार्यों को सामने रखा जाए। अब निगाहें विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी पर रहेंगी, जो तय करेगी कि 27 अगस्त से शुरू होने वाला सत्र वास्तव में कितने दिन चलेगा और सदन का एजेंडा क्या रहेगा।

